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World IBD Day 2026: इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज या आईबीडी (IBD) आंतों से संबंधित एक गंभीर बीमारी है। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 19 मई को वर्ल्ड आईबीडी डे (World IBD Day 2026) मनाया जाता है। इस समस्या में पाचन तंत्र में सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से लंबे समय तक पेट से जुड़ी परेशानियां बनी रह सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार आईबीडी मुख्य रूप से क्रोन्स डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियों से जुड़ा होता है। फिलहाल इसका पूरी तरह स्थायी इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन सही खानपान, दवाइयों और लाइफस्टाइल में बदलाव की मदद से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे में इसके शुरुआती संकेतों को समझना और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है। आइए, जानते हैं कि आईबीडी होता क्या है, इसके लक्षण कैसे होते हैं और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है -

IBD क्या है?
आईबीडी यानी इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज आंतों से जुड़ी एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जिसमें पाचन तंत्र में सूजन आ जाती है। इस वजह से मरीज को पेट दर्द, बार-बार दस्त, कमजोरी और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार इसके लक्षण अचानक तेज हो जाते हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक लंबे समय तक इस समस्या को नजरअंदाज करने से शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए समय रहते जांच और सही इलाज कराना जरूरी माना जाता है।
IBD के लक्षण
आईबीडी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में यह समस्या हल्की होती है, जबकि कई मामलों में लक्षण काफी गंभीर हो सकते हैं। इसकी खास बात यह है कि इसके लक्षण कभी कम हो जाते हैं तो कभी अचानक बढ़ जाते हैं, जिसे फ्लेयर-अप कहा जाता है। इसलिए समय रहते संकेतों को पहचानना जरूरी माना जाता है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल है -
पेट दर्द होना
बार-बार दस्त होना
पेट में मरोड़ होना
मल में खून आना
अचानक वजन घटना
भूख कम लगना
लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
IBD का इलाज कैसे किया जाता है?
आईबीडी के इलाज में डॉक्टर मरीज की स्थिति और लक्षणों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उपचार तय करते हैं। इसका मकसद बीमारी को बढ़ने से रोकना और लंबे समय तक लक्षणों को नियंत्रण में रखना होता है। इसके लिए ऐसी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर में सूजन को कम करने और इम्यून सिस्टम की असामान्य प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। कई मरीजों को स्टेरॉइड्स, इम्यून सपोर्टिव मेडिसिन और बायोलॉजिकल थेरेपी दी जाती है। अगर संक्रमण की समस्या हो जाए, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स भी दे सकते हैं। इलाज के दौरान मरीज की नियमित जांच की जाती है, ताकि दवाओं का असर समझा जा सके और जरूरत पड़ने पर उपचार में बदलाव किया जा सके। कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है। इसमें आंत के प्रभावित हिस्से को हटाया जाता है, ताकि मरीज को राहत मिल सके। इसके साथ ही डॉक्टर संतुलित डाइट, पोषण बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह भी देते हैं। तनाव कम रखना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना भी मरीज की स्थिति को बेहतर बनाने में मददगार माना जाता है।
IBD मैनेज करने के आसान तरीके
आईबीडी को कंट्रोल में रखने के लिए रोज की आदतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी माना जाता है। सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि कौन-सी चीजें आपके लक्षण बढ़ा रही हैं। कुछ लोगों को मसालेदार खाना, कैफीन या कुछ खास ड्रिंक्स से परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से सही डाइट चुनना फायदेमंद रहता है। तनाव भी IBD के फ्लेयर-अप का बड़ा कारण बन सकता है। इसलिए खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें। मेडिटेशन, योग, म्यूजिक, पढ़ाई या अपनी पसंद की किसी एक्टिविटी में समय बिताने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। स्मोकिंग करने वालों के लिए यह आदत समस्या को और बढ़ा सकती है, क्योंकि इससे शरीर में सूजन बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी माना जाता है। इसके अलावा, आईबीडी केमरीजों को बाहर जाते समय जरूरी सामान अपने साथ रखना चाहिए। टिश्यू, वेट वाइप्स, अतिरिक्त कपड़े और जरूरी दवाइयों वाली छोटी इमरजेंसी किट कई बार अचानक होने वाली परेशानी में काफी मददगार साबित हो सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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