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इंसोम्निया या कम नींद आने की समस्या कई लोगों में बढ़ती जा रही है जो हमारे सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है। रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में इंसोम्निया की समस्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती है। जिस कारण महिलाओं के मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर गलत प्रभाव पड़ता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति में किसी भी कारण हो सकती है।
इंसोम्निया एक सामान्य स्लीप डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति को नींद नहीं आती है। अगर वो सो भी जाता है तो कुछ ही समय में उसकी नींद खुल जाती है। रात को सही तरह से नींद न आने के कारण भी कई लोगों को सुबह थकान महसूस होता है। नींद न आने के कारण व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती है। आइए जानते हैं इंसोम्निया के क्या कारण, लक्षण और इलाज है।

इंसोम्निया का कारण
1. साइकोलॉजिकल
तनाव, चिंता, डिप्रेशन और अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां इंसोम्निया का कारण बन सकता है। अक्सर जब व्यक्ति मेंटली फिट नहीं रहता है या फिर किसी तरह का तनाव महसूस करता है तो सबसे पहले उसकी नींद पर असर पड़ता है।
2. लाइफस्टाइल
लोगों के लाइफस्टाइल में होने वाले बदलाव भी नींद न आने का कारन बन सकता है। जैसे देर रात तक फोन या टीवी देखना, रात को देर से सोना, कैफीन का सेनव करने जैसी आदतें भी इंसोम्निया का कारण बन सकता है।
3. मेडिकल कंडीशन
कुछ मेडिकल कंडीशन जैसे कमर का दर्द, अस्थमा, स्लीप एपनिया, आपकी नींद में बाधा डाल सकती है।
4. दवाएं
कुछ दवाएं, जैसे कि एंटीडिप्रेसेंट, कॉर्टिकोस्टेरॉइड नींद न आने की समस्या को उत्पन्न कर सकती है।
5. पर्यावरणीय के कारण
कई बार शोर, रोशनी, टेंपरेचर जैसे पर्यावरणीय कारक भी आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं।
6. जेनेटिक
कई लोगों में इंसोम्निया की समस्या जेनेटिक भी हो सकती है। ऐसे में उन लोगों में दूसरों की तुलना में नींद न आने का खतरा ज्यादा होता है।

इंसोम्निया के लक्षण
1. रात को सोने में समस्या आना
2. बहुत जल्दी जागना और वापस सोने में दिक्कत का सामना करना
3. रात में बार-बार आंख खोलना
4. पूरा दिन थकान महसूस करना और जागने पर फ्रेस फील नहीं करना
5. ध्यान केंद्रित करने या चीजों को याद रखने में मुश्किल आना
6. मूड स्विंग होने के कारण चिड़चिड़ापन, चिंता या डिप्रेशन होना
7. काम में बार-बार गलती करना
8. सिर में दर्द रहना

इंसोम्निया का इलाज
1. लाइफस्टाइल में बदलाव
अपने लाइफस्टाइल में अच्छी नींद की आदतों को अपनाना शामिल करें। जैसे रेगुलर समय पर सोने की आदत डालना, सोने से पहले कैफीन और शराब से दूर रहना, आरामदायक नींद का माहौल बनाना और सोने से पहले एक्टिविटी से बचने की कोशिश करना।
2. कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी
यह टॉक थेरेपी का एक रूप है जो इंसोम्निया की समस्या से निपटने में मदद कर सकता है। इंसोम्निया के लिए कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी में आराम करने की ट्रेनिंग, नींद प्रतिबंध जैसी तकनीकें शामिल है।
3. दवाएं
कुछ मामलों में, इंसोम्निया की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दवाओं की भी मदद ली जा सकती है। लेकिन इन दवाओं को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )



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