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World Thalassemia Day 2023: जानिए विश्व थैलेसीमिया दिवस का इतिहास, थीम और लक्षण और सावधानियां
विश्व थैलेसीमिया दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मई को थैलेसीमिया पीड़ितों की याद में और इस बीमारी के साथ जीने के लिए संघर्ष करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।
थैलेसीमिया खून से जुड़ी एक बहुत ही घातक बीमारी है। जो शरीर को पर्याप्त हीमोग्लोबिन बनाने नहीं देता है। रोग रक्त कोशिकाओं को कमज़ोर और नष्ट कर देता है। इससे जुड़ी जागरुकता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की पहल पर विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।

विश्व थैलेसीमिया दिवस का इतिहास
साल 1994 में पहली बार 'विश्व थैलेसीमिया दिवस' मनाने पर विचार किया गया था। इसी साल थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन ने 8 मई के दिन को थैलेसीमिया के मरीजों के नाम डेडिकेट किया था और इस बीमारी से जूझ रहे रोगियों के संघर्ष के प्रति जन सामान्य में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन की स्थापना की गई थी। तब जॉर्ज एंगलजोस इस थैलेसीमिया अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन के अध्यक्ष और संस्थापक के रूप में काम करते थे।
विश्व थैलेसीमिया दिवस 2023 थीम
इस वर्ष 2023, विश्व थैलेसीमिया दिवस की थीम " अवेयर रहे, शेयर रहे और केयर करें : थैलेसीमिया केयर गैप को पाटने के इस साल की थीम वर्ष 2022 की थीम " अवेयर रहे, शेयर करे और केयर करें, पहल की निरंतरता है। ताकि इस रोग से जुड़ी जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकें और जागरुक किया जा सकें। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के थैलेसीमिया व्यक्तियों का मनोबल बढ़ाया जा सके।
क्या है थैलेसीमिया?
थैलेसीमिया एक जेनेटिक डिसऑर्डर के तौर पर माना जाता है, यानि ये बीमारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में होने का खतरा बहुत अधिक होता है। इस बीमारी में बॉडी में हीमोग्लोबिन बनना बंद हो जाता है।हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में प्रोटीन अणु के रूप में बॉडी में ऑक्सीजन सप्लाई करने का काम करता है। मगर थैलेसीमिया में आरबीसी तेजी से नष्ट होने लगती हैं। इससे मरीज एनिमिक होने लगता है।
थैलेसीमिया के लक्षण
थैलेसीमिया होने पर सर्दी-जुकाम बना रहता है, शरीर बीमार सा लगता है, सांस लेने में तकलीफ महसूस होना, शरीर में कमजोरी और दर्द बना रहना, दांतों का बाहर की ओर निकलना, उम्र के अनुसार शारीरिक विकास न होना, शरीर का पीला पड़ना, उदासी बने रहना। यह सभी थैलेसीमिया के ही लक्षण हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
यदि आप अपनी आने वाली पीढ़ी में थैलेसीमिया से बचाव करना चाहते हैं तो बहुत जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच करवाएं। अपने हीमोग्लोबिन का स्तर नियंत्रित रखें। विवाह से पहली पति-पत्नी अपने रक्त की जांच एकबार जरूर करवा लें। माइनर थैलेसीमिया होने पर अपनी मेडिकेशन से भी इस समस्या का हल निकाला जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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