Ambubachi Mela : कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला शुरू, जानिए यहां के नियम और मेले का महत्व

असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर में आज से वार्षिक अंबुबाची मेला शुरू हो गया है। ये मेला चार दिन तक चलता है, जो पूरे भारत में बहुत मशहूर है और इस मेले में देश-दुनियाभर से लाखों लोग आते हैं। कामाख्या मंदिर सबसे प्रतिष्ठित और भारत के 51 शक्तिपीठों में से सबसे पुराने शक्तिपीठों में से एक है। ऐसे में आइए जानते हैं इस मेले से जुड़े अहम नियमों के बारे में और इसके महत्व के बारे में...

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अम्बुबाची मेले के लिए दिशा-निर्देश

1. परंपराओं का करें सम्मान
अंबुबाची मेला एक धार्मिक त्योहार है, इसलिए इस आयोजन के दौरान सभी रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करना बहुत महत्वपूर्ण है। श्रद्धा के साथ अनुष्ठानों का पालन करें और उनमें हिस्सा लें।

2. सही तरह के कपड़े पहनें
कामाख्या मंदिर जाते समय ढंग के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। त्योहार से जुड़ी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए दिखावटी या गलत आउटफिट्स को ना चुनें।

3. भीड़ के लिए रहे तैयार
अंबुबाची मेला बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है। ऐसे में आप भीड़ की अपेक्षा करें और उसी के हिसाब से अपनी यात्रा की योजना बनाएं। धैर्य रखें और हलचल भरे माहौल के बीच शांत रहने की कोशिश करें।

4. साफ-सफाई का रखें ध्यान
मंदिर परिसर को साफ-सुथरा और कूड़े-कचरे से दूर रखने की कोशिश करें। कचरे को कूड़ेदान में डालें, और अधिकारियों द्वारा दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

5. फोटोग्राफी के लिए परमिशन लें
अंबुबाची मेला के दौरान फोटोग्राफी के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आप तस्वीरें लेना चाहते हैं, तो मंदिर अधिकारियों से अनुमति जरूर लें। उनके द्वारा लगाए गए किसी भी प्रतिबंध का सम्मान करें औऱ किसी भी नियम को तोड़ने से बचें।

6. पवित्र वस्तुओं को छूने से बचें
मंदिर परिसर के अंदर कुछ क्षेत्रों या वस्तुओं को पवित्र या प्रतिबंधित माना जा सकता है। किसी भी संकेत या निर्देश का सम्मान करते हुए उन चीजों को छुने से बचें।

अम्बुबाची मेले का महत्व -

1. देवी के मासिक धर्म चक्र का उत्सव
अंबुबाची मेला देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन तीन दिनों के दौरान, मंदिर की प्रमुख देवी, देवी कामाख्या, मासिक धर्म की अपनी वार्षिक अवधि से गुजरती हैं। इसे देवी के पुनर्जनन और प्रजनन क्षमता का समय माना जाता है।

2. आध्यात्मिक सफाई और कायाकल्प
अंबुबाची मेला तीव्र आध्यात्मिक ऊर्जा और शुद्धि का काल माना जाता है। इन दिनों के दौरान, मंदिर अनुष्ठानिक सफाई और पूजा के लिए बंद रहता है। ऐसा माना जाता है कि देवी इस दौरान खुद को शुद्ध कर नया बना रही हैं, और भक्त इसे अपनी आध्यात्मिक शुद्धि और कायाकल्प के मौके के रूप में देखते हैं।

3. तीर्थयात्रा और भक्ति
अंबुबाची मेला भारत के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों और भक्तों को आकर्षित करता है, जो देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं। यह भक्तों के लिए प्रार्थना करने, अनुष्ठान करने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए बहुत अच्छा समय माना जाता है।

4. तांत्रिक प्रथाएं और अनुष्ठान
कामाख्या देवी मंदिर तंत्र से जुड़ा है, जो हिंदू धर्म की एक शाखा है और दैवीय ऊर्जा के दोहन और संचालन पर केंद्रित है। अंबुबाची मेला तांत्रिक पुजारियों की भागीदारी का गवाह बनता है जो देवी की ऊर्जा और आशीर्वाद का आह्वान करने के लिए कई अनुष्ठानों और प्रथाओं में जुड़ा है।

5. सांस्कृतिक महत्व
अंबुबाची मेला न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है। यह असम और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है। इसमें पारंपरिक संगीत, नृत्य, सांस्कृतिक प्रदर्शनियाँ और स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों की बिक्री होती है।

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Story first published: Thursday, June 22, 2023, 12:30 [IST]
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