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अनंत अंबानी ने तिरुपति बालाजी मंदिर में दान किए अपने बाल, जानें क्या है 'केश दान' परंपरा का महत्व
Anant Ambani: उद्योगपति मुकेश अंबानी के छोटे बेटे और रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने रविवार को आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए। इतना ही नहीं, उन्होंने प्राचीन धार्मिक परंपरा को अपनाते हुए अपने बाल भी दान किए। केश दान करने के बाद सोशल मीडिया पर अनंत की इस यात्रा से जुड़ी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। हिंदू धर्म में बाल दान को श्रद्धा, समर्पण और अहंकार के त्याग का प्रतीक माना जाता है। ऐसा जाता है कि भक्त अपने बाल अर्पित करने के बाद अपने अहंकार और नकारात्मक भावों का भी त्याग कर देता है और अपने आप को पूरी तरह ईश्वर की आराधना में समर्पित कर देता है। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए प्रति वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस परंपरा को निभाने के लिए तिरुपति पहुंचते हैं।

क्या है बाल दान का धार्मिक महत्व?
मंदिर में बाल दान करना अहंकार और सौंदर्य का त्याग कर ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी भक्त की मनोकामना पूर्ण हो जाती है, तो वह भगवान को धन्यवाद करने के लिए अपने बालों को दान करता है और इन्हें भगवान को समर्पित करता है तिरुपुरा बालाजी मंदिर में वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है, यहां प्रतिदिन हजारों की संख्यां में लोग मुंडन कराते हैं, जिसे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक दानों में गिना जाता है ।
काफी पुरानी है बाल दान की परंपरा
हिंदू धर्म में बाल दान करने की पुरानी और धार्मिक परंपरा है। कई लोग अपनी श्रद्धा और आस्था के भाव से मंदिर में अपने बाल भगवान को अर्पित करते हैं। वहीं, कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पूरी होने पर भगवान को धन्यवाद के स्वरूप में बाल दान करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर को 25 इलेक्ट्रिक बसें दान करने की घोषणा
तिरुमाला की परिवहन व्यवस्था को आसान बनाने के लिए अनंत अंबानी प्रशासन के साथ बातचीत की इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि रिलायंस इंडस्ट्रीज तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को 25 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराएगी। और इन बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाएंगे जिससे कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरीके की समस्या का सामना न करना पड़े।
भगवान वेंकटेश्वर कौन हैं?
आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर हिंदू धर्म के सबसे प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में गिना जाता है। पहाड़ियों के बीच बने इस मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में स्थापित भगवान वेंकटेश्वर को बालाजी, श्रीनिवास और गोविंदा के नाम से भी पुकारा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर भगवान विष्णु का ही एक स्वरूप हैं, जिन्होंने धरती पर आकर अपने भक्तों का मार्गदर्शन किया। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से भगवान के दर्शन और पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मन को शांति मिलती है। धार्मिक कथाओं में तिरुमला को वह पवित्र स्थान बताया गया है, जहां भगवान विष्णु ने लोककल्याण के लिए वेंकटेश्वर रूप में निवास किया था।



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