Latest Updates
-
Summer Tips: गर्मियों में रहना है कूल और फ्रेश, तो अपनाएं एक्सपर्ट के बताए ये 5 टिप्स -
Everyone Will Ask Recipe Dahi Puri: घर पर बनाएं बाजार जैसी चटपटी दही पूरी -
किस उम्र के बच्चों को कितना आम खिलाएं? डॉक्टर ने बताया छोटे बच्चों को आम खिलाने का सही तरीका -
Inflammatory Bowel Disease: आंतों को अंदर से सड़ा देती है ये बीमारी, जानिए इसके लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके -
Light Digestive Moong Dal Recipe: पेट के लिए हल्की और पौष्टिक दाल बनाने का आसान तरीका -
Inflammatory Bowel Disease से निजात पाने के लिए करें ये 5 योगासन, पाचन संबंधी समस्याओं से जल्द मिलेगी राहत -
गर्मियों में इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं पीनी चाहिए छाछ, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Methi Paratha Recipe: अब घर पर बनाएं कड़वाहट मुक्त और नरम मेथी के पराठे -
Bada Mangal 2026 Wishes: संकटमोचन का नाम...तीसरे बड़े मंगल पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Paneer Butter Masala Recipe: पनीर बटर मसाला घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा क्रीमी और लाजवाब स्वाद
Baisakhi 2026: 13 या 14 अप्रैल, कब है बैसाखी? जानें सही तारीख, महत्व और इतिहास
Baisakhi 2026: बैसाखी हिंदू और सिख धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। खासतौर पर पंजाब और हरियाणा में इसे बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। इसे वैसाखी के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से एक कृषि उत्सव है, जो रबी फसल की कटाई की खुशी को दर्शाता है। यह दिन सिर्फ खेती-किसानी से जुड़ा नहीं है, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से भी खास महत्व रखता है। सिख समुदाय के लिए यह दिन नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक होता है, जो नई ऊर्जा और उम्मीद लेकर आता है। आइए, जानते हैं कि साल 2026 में बैसाखी कब मनाई जाएगी? साथ ही, इस पर्व की परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका महत्व क्या है -

बैसाखी 2026 कब है?
बैसाखी हर साल मेष संक्रांति के दिन मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे नए सौर वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। दृक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में बैसाखी 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी। अगर शुभ समय की बात करें तो
संक्रांति का समय सुबह 9 बजकर 39 मिनट तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 57 मिनट से 5 बजकर 43 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इस दिन इन शुभ समयों में पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना बेहद फलदायी माना जाता है।
कब और कैसे शुरू हुई बैसाखी मनाने की परंपरा?
बैसाखी का इतिहास सिख धर्म में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ से जुड़ा हुआ है। साल 1699 में, 13 अप्रैल के दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। कहा जाता है कि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने 'पंज प्यारों' को अमृत छकाकर एक नई धार्मिक पहचान दी। इसके साथ ही उन्होंने समाज में फैले ऊंच-नीच और भेदभाव को खत्म करने का संदेश दिया और सिखों को 'सिंह' और 'कौर' की उपाधि दी। इसी ऐतिहासिक घटना के बाद से बैसाखी का दिन सिख समुदाय के लिए बेहद खास बन गया और इसे खालसा पंथ के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाने लगा। आज भी यह पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
क्या है बैसाखी पर्व का महत्व?
बैसाखी का दिन धार्मिक, ज्योतिषीय और सामाजिक तीनों ही दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। यह परिवर्तन नए सौर वर्ष की शुरुआत का संकेत देता है, इसलिए इसे नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सिख परंपरा में भी इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि गुरु गोविंद सिंह जी ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस वजह से बैसाखी को सिख नववर्ष के रूप में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा, यह पर्व खेती-किसानी से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। रबी फसल की कटाई के साथ किसानों के लिए यह खुशी और समृद्धि का प्रतीक बन जाता है। खासकर, पंजाब और हरियाणा में इस दिन को बड़े जोश और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
कैसे मनाया जाता है बैसाखी का पर्व?
बैसाखी के मौके पर पूरे देश, खासकर पंजाब और हरियाणा में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिलता है। इस दिन गुरुद्वारों को फूलों और रोशनी से सुंदर तरीके से सजाया जाता है। सुबह-सुबह श्रद्धालु उठकर गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं, जहां विशेष अरदास और कीर्तन का आयोजन होता है। इसके अलावा 'पंच प्यारों' की अगुवाई में भव्य नगर कीर्तन भी निकाले जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस दिन लोग नए और रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं और खुशियां मनाते हैं। ढोल की थाप पर पुरुष भांगड़ा करते हैं, जबकि महिलाएं पारंपरिक गिद्धा नृत्य के जरिए अपनी खुशी जाहिर करती हैं। साथ ही, गुरुद्वारों में विशाल लंगर का आयोजन होता है, जहां बिना किसी भेदभाव के सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं। यही इस पर्व की सबसे खूबसूरत बात है, जो समानता और भाईचारे का संदेश देती है।



Click it and Unblock the Notifications