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Holi Faag Geet : अरे, होली खेलै रघुबीरा... यहां देखें होली के लोकप्रिय फाग, नोट कर लें लिरिक्स
Holi Ke Faag Lyrics In Hindi : होली का त्योहार रंगों और उल्लास का प्रतीक है, जिसमें गीतों की खास परंपरा भी देखने को मिलती है। इस बार होली 14 मार्च 2025 को मनाई जाएगी। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार में गाए जाने वाले फाग गीत होली का अहम हिस्सा होते हैं। ये गीत फाल्गुन महीने में गाए जाते हैं, इसलिए इन्हें फाग कहा जाता है। यूपी के कुछ हिस्सों में इन्हें फगुआ भी कहा जाता है। ढोलक, मंजीरा और झांझ की संगत में गाए जाने वाले ये गीत लोगों को मस्ती में झूमने पर मजबूर कर देते हैं। गांवों और शहरों में होली की महफिलें फाग के बिना अधूरी मानी जाती हैं। कृष्ण-राधा की होली, ब्रज की लट्ठमार होली और प्रेम व रंगों से भरे ये गीत होली के उल्लास को दोगुना कर देते हैं।
फाग गायन की परंपरा फाल्गुन पूर्णिमा तक चलती है, जब फगुआरों की टोली अबीर-गुलाल खेलकर उत्सव मनाती है। धमार फाग देवताओं को प्रसन्न करने के लिए गाया जाता है, जबकि चैत्र मास में चैता गाने की परंपरा होती है। यहां पढ़ते हैं कुछ लोकप्रिय फाग और होली के गीत।

1. होली के फाग
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
घेर लई सब गली रंगीली,
छाय रही छबि छटा छबीली,
जिन ढोल मृदंग बजाये हैं,
बंसी की घनघोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
जुर मिल के सब सखियाँ आई,
उमड घटा अंबर में छाई,
जिन अबीर गुलाल उडाये हैं,
मारत भर भर झोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
ले रहे चोट ग्वाल ढालन पे,
केसर कीच मले गालन पे,
जिन हरियल बांस मंगाये हैं,
चलन लगे चहुँ ओर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
भई अबीर घोर अंधियारी,
दीखत नही कोऊ नर और नारी,
जिन राधे सेन चलाये हैं,
पकडे माखन चोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
जो लाला घर जानो चाहो,
तो होरी को फगुवा लाओ,
जिन श्याम सखा बुलाए हैं,
बांटत भर भर झोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
राधे जू के हा हा खाओ,
सब सखियन के घर पहुँचाओ,
जिन घासीराम पद गाए हैं,
लगी श्याम संग डोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
फाग खेलन बरसाने आये हैं,
नटवर नंद किशोर ।
2. जोगीरा सारा रा रा र... होली के फाग
काहे खातिर राजा रूसे काहे खातिर रानी।
काहे खातिर बकुला रूसे कइलें ढबरी पानी॥ जोगीरा सारा रा रा रा
राज खातिर राजा रूसे सेज खातिर रानी।
मछरी खातिर बकुला रूसे कइलें ढबरी पानी॥ जोगीरा सारा रा रा रा
केकरे हाथे ढोलक सोहै, केकरे हाथ मंजीरा।
केकरे हाथ कनक पिचकारी, केकरे हाथ अबीरा॥
राम के हाथे ढोलक सोहै, लछिमन हाथ मंजीरा।
भरत के हाथ कनक पिचकारी, शत्रुघन हाथ अबीरा॥
3. खेले मसाने में होरी... होली के फाग (Massan Holi Faag)
खेले मसाने में होरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी,
भूत पिशाच बटोरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी ॥
गोप ना गोपी श्याम ना राधा,
ना कोई रोक ना कौनो बाधा,
ना साजन ना गोरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी ॥
नाचत गावत डमरू धारी,
छोड़े सर्प गरल पिचकारी,
पीटे प्रेत थपोरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी ॥
भूतनाथ की मंगल होरी,
देख सिहाये बिरज की छोरी,
धन धन नाथ अघोरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी ॥
खेले मसाने में होरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी,
भूत पिशाच बटोरी,
दिगम्बर,
खेले मसानें में होरी ॥
4. होली खेले रघुवीरा... .. होली के फाग (Bagheli phagua ke gana)
होली खेले रघुवीरा अवध मा,
होली खेले रघुवीरा,
होली खेले रघुवीरा, होली खेले रघुवीरा,
होली खेले रघुवीरा अवध मा,
होली खेले रघुवीरा.............
किनका के हाथ कनक पिचकारी,
किनका के हाथ अबीर झोली
मोहे होली में कर दियो लाल रे,
ऐसो चटक रंग डारो,
ऐसो चटक रंग डारो, ऐसो चटक रंग डारो,
ऐसो चटक रंग डारो, अवध मा...........
होली खेले रघुवीरा,
राम के हाथ कनक पिचकारी,
सीता हाथ अबीर झोली,
रंग डारो, रंग डारो,
रंग डारो श्याम खेले होली, रंग डारो,
गोविंदा आला रे आला,
जरा रंग तो ना डाल नंदलाला........
5. ब्रज फाग लोकगीत
ब्रज में मचा है फाग तू खेलन आजा नंदलाला,
खेलन आजा खेलन आजा.......
राधा रानी को संग में लाना,
रंगों से कर देगे लाल तू खेलन आजा नंदलाला,
ब्रज में मचा है फाग तू खेलन आजा नंदलाला.......
मैया यशोदा को संग में लाना,
गजब करेगे धमाल तू खेलन आजा नंदलाला,
ब्रज में मचा है फाग तू खेलन आजा नंदलाला.......
गोप गोपियाँ संग में लाना,
रंगों की आयी बहार तू खेलन आजा नंदलाला,
ब्रज में मचा है फाग तू खेलन आजा नंदलाला.......
चढ़ी गजब की मस्ती कमल सिंह,
तेरा करे इंतजार तू खेलन आजा नंदलाला,
ब्रज में मचा है फाग तू खेलन आजा नंदलाला.......
6. ब्रज में फाग गीत (Braj Faag Geet)
अरे बदलो ले लूँगी दारी के,
होरी का तोहे बड़ा चाव
कहाँ जाएगा रसिया भाज
हाँ भाज...बदलो ले लूँगी दारी के
तू सुनले मेरे साँवरिया
यहाँ धर दे मुकुट और कांवरिया
छलबलिया धोकेबाज
बदलो ले लूँगी दारी के....
नित ब्रिज गोपीन को छेड़त हो
मोसे अटपाती बानी बोलत हो
तोहे नेक ना आवे लाज
बदलो ले लूँगी दारी के....
होरी का तोहे बड़ा चाव
बड़ा चाव...
बदलो ले लूँगी दारी के....
फस गायेओ आज जनाने में
तेरी नाई चलेगी बरसाने में
यहाँ श्यामा जी को राज
बदलो ले लूँगी दारी के....
होरी का तोहे बड़ा चाव
बड़ा चाव...
बदलो ले लूँगी दारी के....
तेरे शीश चुनरिया धारेंगी
नैनन में अंजन बारेंगी
तेरे मारूंगी गुलचा गाल
बदलो ले लूँगी दारी के....
होरी का तोहे बड़ा चाव
बड़ा चाव...
बदलो ले लूँगी दारी के....
तेरी मात यशोदा आवेगी
होरी को फगुआ लावेगी
या ब्रज को यही रिवाज़
बदलो ले लूँगी दारी के....
होरी का तोहे बड़ा चाव
बड़ा चाव...
बदलो ले लूँगी दारी के....
अब क्यों दुबक रहियो रे लहंगा में
निकल मेरी सारी पे रंग डार
बदलो ले लूँगी दारी के....
होरी का तोहे बड़ा चाव
बड़ा चाव...
बदलो ले लूँगी दारी के....
7. कोयलिया, अरे कोयलिया...बघेली फगुआ ( Bagheli Holi Fagua)
अरे हाँ सुगा कै नीक ना लागैय पिजड़ा
अरे हाँ सुगा कै नीक ना लागैय पिजड़ा -2
अरे नीकउ ना लागैय पिजड़ा सुगा कै - नीकउ ना लागैय पिजड़ा
अरे नीकउ ना लागैय पिजड़ा सुगा कै
अरे कोयलिया - कोयलिया, अरे कोयलिया...
अरे कोयलिया कतरय आम सूगा कै नीकउ ना लागै पिजड़ा...
अरे कोयलिया, अरे कोयलिया कतरय आम सूगा कै नीकउ ना लागै पिजड़ा...
हाँ हाँ हो नीकउ ना लागै सुगा के पिजड़ा....
ए नीकउ ना लागय पिजड़ा सुगा कै.....
अरे कोयलिया कतरय आम सुगा कै नीकउ ना लागै पिजड़ा.......
अरे नीकउ ना लागै पिजड़ा सुगा कै - नीकउ ना लागै पिजड़ा.
कोयलिया कतरय आम सुगा कै नीक न लागै पिजड़ा
ए नीकउ ना लागै पिजड़ सुगा कै...
कोयलिया कतरय आम सुगा कै नीकउ ना लागै पिजड़ा....
8. आज बिरज में होरी रे रसिया (Bundeli Faag Song)
आज बिरज में होरी रे रसिया।
कौना गांव के कुंअर कन्हैया,
कौना गांव की गोरी रे रसिया। आज...
नन्दगांव के कुंअर कन्हैया,
बरसाने की गोरी रे रसिया। आज...
अपने-अपने महल से निकरीं सखी सब
कोऊ श्यामल कोऊ गोरी रे रसिया। आज...
उड़त गुलाल लाल भये बादर,
मारत भर-भर रोरी रे रसिया। आज..



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