Budhwa Mangal 2024: कब कब मनाया जाएगा बड़ा मंगल, जानें क्या है इस दिन की मान्यता

Budhwa Mangal 2024 Kab Hai: सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह का बहुत ही विशेष महत्व होता है। ज्यादातर हनुमान भक्तों के लिए यह बहुत ही खुशनुमा पल होता है क्योंकि ज्येष्ठ माह में प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगलवार के रूप में मनाया जाता है। इसे बुढ़वा मंगल के नाम से भी जाना जाता है।

इस पावन पर्व पर भगवान हनुमान जी की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से सुख, शांति, समृद्धि तथा संपत्ति की प्राप्ति होती है। जाने इस वर्ष ज्येष्ठ माह में कब है सबसे बड़ा मंगलवार, इसके साथ ही विस्तारपूर्वक जानते हैं संपूर्ण जानकारी:

Budhwa Mangal 2024 Kab Hai Date Shubh Muhurat Significance and Why Do We Celebrate Bada Mangal

साल 2024 में कब है बड़ा मंगलवार? (Budhwa Mangal 2024 Date and Shubh Muhurat)

हिंदू पंचांग के मुताबिक 22 मई को सायं काल 6:48 से वैशाख पूर्णिमा प्रारंभ होगी और इसके अगले दिन 23 मई को सायं काल 7:23 पर इसकी समाप्ति होगी। इसके साथ-साथ सायं काल 7:23 से ही ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। ज्येष्ठ का पावन महीना 24 मई 2024 से प्रारंभ हो रहा है और बुढ़वा मंगल 28 मई 2024 को पड़ रहा है।

ज्येष्ठ माह 2024 में कब-कब होगा बुढ़वा मंगल (Bada Mangal Date List in 2024)

पंचांग के अनुसार 28 मई के अलावा ज्येष्ठ माह में बुढ़वा मंगल 4, 11 और 18 जून को होगा।

बुढ़वा मंगल का महत्व (Significance of Budhwa Mangal)

सनातन धर्म में बुढ़वा मंगल का बहुत ही विशेष महत्व है। उत्तर प्रदेश के अधिकतर इलाकों में बुढ़वा मंगल के पावन पर्व को बड़े ही धूमधाम तथा हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक माना जाता है कि इस दिन भगवान हनुमान जी प्रभु श्री रामचंद्र से सर्वप्रथम बार मिले थे। इसके अलावा इसी माह में हनुमान जी ने भीम का अहंकार तथा घमंड भी तोड़ा था। माना जाता है इस खास दिन पर भगवान हनुमान जी की विधि विधान से पूजा अर्चना करने पर रोग, दोष, कष्ट समेत संपूर्ण परेशानियाँ दूर हो जाती है तथा सुख, शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस पावन पर्व पर हनुमान जी को लाल या नारंगी रंग का चोला चढ़ाने से शारीरिक तथा आर्थिक समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।

क्यों मनाते हैं बुढ़वा मंगल (Bada Mangal Kyu Manate Hain?)

यह घटना महाभारत काल की है। भीम को अपने शक्ति का बहुत ही ज्यादा अहंकार तथा घमंड था क्योंकि भीम बहुत ही बलवान थे। उनके पास हजारों हाथियों की ताकत थी। ऐसे में भीम का घमंड चकनाचूर करने के लिए भगवान हनुमान जी ने बूढ़े बंदर का भेष धारण करके भीम के घमंड को नष्ट कर दिया। इस घटना के पश्चात इस दिन को बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाने लगा।

एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक सर्वप्रथम इस दिन भगवान श्री रामचंद्र से हनुमान जी की भेंट हुई थी। जब सर्वप्रथम हनुमान जी भगवान श्री रामचंद्र से मिले थे, तब उन्होंने बूढ़े ऋषि का भेष धारण करके भगवान श्री रामचंद्र के समक्ष आए थे। इसी कारण इस दिन को लोग बुढ़वा मंगल के नाम से जानने लगे।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Tuesday, May 14, 2024, 10:16 [IST]
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