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पिछले पांच दिनों से भक्तगण मां दुर्गा की अराधना में लीन हैं। नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग अलग रूपों को समर्पित होते हैं।
नवरात्र के छठे दिन, 27 मार्च को मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी ऋषि कात्यायन की पुत्री थी।

पूरी श्रद्धा से मां कात्यायनी की आराधना करने से प्रेम और विवाह के सम्बन्ध में आ रही अड़चनों से मुक्ति मिलती है। मां कात्यायनी शेर पर सवार होती हैं और चार भुजाओं में तलवार, कमल, उपर की ओर उठा हुआ और वर देने की मुद्रा में होता है। मां के सिर पर मुकुट तेजस्वी मुकुट होता है।
जानते हैं नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त, मन्त्र एवं आरती:
कात्यायनी माता की पूजा का शुभ मुहूर्त
षष्ठी तिथि की शुरुआत 26 मार्च को दोपहर 04:32 बजे से होगी और समापन 27 मार्च को शाम 05:27 बजे होगा। वहीं गोधुलि मुहूर्त शाम के 06:35 से 06:58 तक रहेगा। इस दिन पूरा दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है।
वहीं पूजा के लिए रवि योग सुबह 06:18 बजे से दोपहर 03:27 बजे तक रहेगा। वहीं अमृत सिद्धि योग दिन के 03:27 बजे से शुरू हो जाएगा जो पूरे दिन चलेगा।
मां कात्यायनी पूजा मंत्र

ॐ कात्यायनी महामये महायोगिन्यधीश्वरी। नंद गोप सुतं देहि पतिं में कुरुते नम:।।
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि॥
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।।
मां कात्यायनी आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी, जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा, वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं, यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी, कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते, हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की, ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली, अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो, ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी, भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे, कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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