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Chaitra Navratri 2024 Day 2: जानें माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, कथा, मंत्र और आरती
Chaitra Navratri 2024 Day 2 Puja Vidhi: भक्ति और मंगल कामना के साथ चैत्र नवरात्रि का पहला दिन मां दुर्गा की अराधना में गुज़रा। अब नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित रहेगा।
मां ब्रह्मचारिणी को तप की देवी माना जाता है और उनकी उपासना से धैर्य, सयंम और सदाचार जैसे गुणों का विकास होता है। 9 अप्रैल से शुरू हुए चैत्र नवरात्र का पर्व 17 अप्रैल तक चलेगा, और रामनवमी के साथ ही इसका समापन होगा। आइये जानते हैं नवरात्रों के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की विधि, भोग, आरती और मंत्र आदि की जानकारियां विस्तार में -
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा शास्त्रीय विधि से की जाती है। सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत होकर पीले या सफ़ेद वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल छिड़कर स्वच्छ करें और मां दुर्गा की मूर्ति या फोटो पर भी गंगाजल छिड़के।
इसके बाद धूप, अगरबत्ती और दीपक प्रजवलित करें। फिर मां को अक्षत, रोली, कुमकुम और लाल रंग के फूल अर्पित करें। इसके बाद मां का ध्यान लगाएं और इस मंत्र का जाप करें -
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां के भोग में पंचामृत, कोई सफ़ेद मिठाई या मिश्री चढ़ाना चाहिए। इसके बाद मां की आरती करें और मंत्र का पाठ करें।
इसके बाद कलश और नवग्रह की भी पूजा करें। मां की सुबह की पूजा निराहार रहकर की जाती है, जो एक तरह से तप का संकेत होता है।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी हिमालय पुत्री थीं और भगवान् शिव को प्राप्त करने की इच्छा रखती थीं। नारदमुनि की सलाह पर उन्होंने हिमालय की चोटियों पर तप करना शुरू किया। उन्होंने 1000 वर्षों तक केवल फलाहार लिया। इस कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया।
अपने इस कठोर तप के माध्यम से उन्होंने कई राक्षसों का भी अंत किया। तप से प्रसन्न होकर देवी देवताओं और मुनि ने उन्हें शिव की अर्धांगिनी बनने का आशीर्वाद दिया और पार्वती रूप धारण कर वे भोले की संगिनी भी बनी।
मां ब्रह्मचारिणी को उनके तप, संयम, त्याग और संघर्ष के लिए पूजा जाता है। और सच्चे मन से उनकी उपासना से भक्तों को भी यह गुण प्राप्त होते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी आरती
जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता,
ब्रह्मा जी के मन भाती हो,
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा,
जिसको जपे सकल संसारा,
जय गायत्री वेद की माता,
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए,
कोई भी दुख सहने न पाए
उसकी विरति रहे ठिकाने,
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर,
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर,
आलस छोड़ करे गुणगाना,
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम,
पूर्ण करो सब मेरे काम,
भक्त तेरे चरणों का पुजारी,
रखना लाज मेरी महतारी। ।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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