Latest Updates
-
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश -
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं
Chaitra Navratri 2025 3rd Day : नवरात्रि के तीसरे दिन कैसे मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें मंत्र, आरती और भोग
Chaitra Navratri 2025 3rd Day : मां चंद्रघंटा का रूप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी है, जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस दिन विशेष पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जीवन में खुशहाली आती है और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। पूजा के फलस्वरूप, लोग अधिक सम्मान देने लगते हैं। मां चंद्रघंटा का यह रूप विशेष रूप से सरल और शांति से परिपूर्ण है। वे अपने भक्तों की समृद्धि में वृद्धि करने के लिए प्रसिद्ध हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा से न केवल भौतिक सुख में वृद्धि होती है, बल्कि समाज में प्रभाव भी बढ़ता है।
विशेष रूप से इस बार द्वितीया और तृतीया नवरात्रि व्रत एक ही दिन किया जाएगा। आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजाविधि, भोग, पूजा मंत्र और आरती के बारे में।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर एक घंटे के आकार का चंद्रमा स्थित है, जिससे उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। यह नाम उनके दिव्य रूप को दर्शाता है, जिसमें एक अद्वितीय तेज और ममता समाहित है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत अलौकिक और भव्य माना जाता है। उनका रूप शांतिपूर्ण होने के साथ-साथ उनकी शक्ति भी अद्वितीय है, जो हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि प्रदान करती है। मां चंद्रघंटा की पूजा से जीवन के सभी पहलुओं में सफलता प्राप्त होती है। विशेष रूप से, इस दिन सूर्योदय से पहले पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इस समय मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजा में लाल और पीले गेंदे के फूल चढ़ाने का महत्व है, क्योंकि ये फूल मां की ममता और शक्ति का प्रतीक हैं। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्द्धचंद्र के आकार का घंटा स्थित है, जो उनकी महिमा और तेजस्विता को दर्शाता है।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें: सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें।
वस्त्र अर्पण: पूजा में मां को लाल और पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
सामग्री अर्पण: मां को कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
पसंदीदा रंग: मां चंद्रघंटा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का प्रयोग करें।
भोग अर्पण: मां चंद्रघंटा को पीले रंग की मिठाई और दूध से बनी खीर का भोग अर्पित करें।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें।
आरती: दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में मां चंद्रघंटा की आरती का पाठ करें।
फल: विधिपूर्वक पूजा करने से मां चंद्रघंटा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में खीर का भोग अर्पित करना सर्वोत्तम माना जाता है। मां को विशेष रूप से केसर की खीर बहुत पसंद है। इसके अतिरिक्त, आप लौंग, इलायची, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाइयां भी मां को भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं। भोग में मिसरी जरूर रखें और साथ ही पेड़े भी चढ़ा सकते हैं।
मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढ़ा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
रंग, गदा, त्रिशूल, चापचर, पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाए।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।
मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। यह पूजा न केवल मानसिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य भी लाती है।



Click it and Unblock the Notifications