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Chanakya Niti: जानें किस व्यक्ति को चाणक्य ने माना है सागर से भी श्रेष्ठ
आचार्य चाणक्य ने अपने शास्त्र, लेखों और शिक्षाओं से मानव जीवन के बारे में कई सार्थक मूल्यों और नीतियों को साझा किया। उन्होंने राजनीति, अर्थशास्त्र, विदेश नीति और कूटनीति के साथ साथ पारिवारिक और सामाजिक जीवन को जीने के मूल्यों को भी बखूभी समझाया है।
उन्होंने अपने ग्रन्थ चाणक्य नीति के ज़रिये मानव जीवन के छिपे हुए सत्यों को ज़ाहिर किया। वे कुछ श्लोकों में प्रकृति का सहारा लेकर जीवन के गूढ़ रहस्यों के बारे में इंगित करते हैं।
आइये समझते हैं आचार्य चाणक्य द्वारा लिखे गए ऐसे ही कुछ श्लोकों के बारे में विस्तार से -

कस्य दोषः कुले नास्ति व्याधिना को न पीडितः।
व्यसनं केन न प्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम्।।
चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि दोष किसके कुल में नहीं होता? हर कोई कभी न कभी रोग से पीड़ित होता है। कौन हमेशा सिर्फ सुखी ही रहता है, और कौन कभी दुःख ही नहीं पाता? अर्थात आचार्य का कहना है कि जीवन में हमेशा किसी न किसी चीज़ की कमी रहती ही है।
कभी हम खुशियों से घिरे रहते हैं, कभी हम दुखों का सामना करते हैं। सुखों और दुखों के इन्हीं पलों से ही जीवन चलता रहता है। इसलिए कभी भी किसी की कमी होने से दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि नए अवसरों की तलाश करते रहनी चाहिए।

प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः।
सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि न साधव।।
इस श्लोक में उनका कहना है कि जिस सागर को हम शांत और गंभीर समझते हैं, वही सागर प्रलय आने पर अपनी सारी मर्यादा तोड़ देता है, और किनारों की सीमाओं को लांघते हुए सब कुछ उजाड़ देता है। लेकिन साधू प्रवृति का व्यक्ति इस बात का ख्याल रखता है कि क्रोध के समय वो अपनी मर्यादाओं को ना लांघे। इसलिए ऐसे व्यक्ति को सागर से भी श्रेष्ठ माना गया है।

शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे।
साधवो न हि सर्वत्र चन्दनं न वने वने।।
इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य बोलते हैं कि हर पर्वत में सोने-चांदी की मणिकाएं नहीं मिलती है, हर व्यक्ति में साधू संत नहीं मिलते और हर वन में चन्दन के वृक्ष नहीं मिलते हैं। अर्थात अच्छी चीज़ें कम होती हैं, दुर्लभ होती हैं। इसलिए जीवन में जितना अच्छा और सुख मिला होता है उसी से संतुष्ट रहना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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