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ईसाई धर्म और बुद्धत्व

गसान ने कहा- मैनें कभी इसे पढ़ा भी नही।
छात्र ने तुरन्त सेन्ट मैथ्यू से बाइबिल लेकर पढ़ना शुरू कर दिया- क्यों लोग वस्त्र और पोशाक के बारे में सोचते है, क्षेत्र में उगी लिली पर विचार करते है कि वह कैसे बढ़ती है। वह कठोर परिश्रम क्यों नही करते है, न हीं भटकते है। और अभी तक मैं कहता हूं कि सुलैमान की सभी महिमा और गौरव में से कोई नही है। वह आने वाले कल के बारे में नही सोचते है बल्कि कल जो होगा उसके बारे में विचार करते है।
इन बातों को सुनकर गसान ने कहा- जिसके द्वारा भी इन शब्दों को कहा गया है वह प्रबुद्ध व्यक्ति है। छात्र ने आगे पढ़ते हुऐ कहा- पूछो तो पता चल ही जाऐगा, खोजो तो तुम्हे मिल ही जाऐगा, दस्तक दो तो दरवाजा खुल ही जाऐगा।
यह हर किसी के लिए है कि असकेत रिसिवेथ हैं और वह सीकेत फाइन्ड़ेथ थे जिसे करने के लिए नॉकेथ है जो कि सभी के लिए समान है।
इस पर गसान ने टिप्पणी करते हुए कहा- बहुत सही। जिस किसी ने भी यह कहा है वह बुद्धत्व से दूर नही है। सभी धर्म एक ही शिक्षा देते है बस उनके माध्यम अलग-अलग है।



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