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Dattatreya Jayanti 2024: ब्रह्मा-विष्णु-महेश के अवतार हैं भगवान दत्तात्रेय, नोट करें उनकी जयंती का शुभ दिन
Dattatreya Jayanti 2024: भगवान दत्तात्रेय को गुरु और भगवान का स्वरूप माना जाता है। उनकी पूजा से व्यक्ति को गुरु और ईश्वर दोनों का आशीर्वाद मिलता है।
दत्तात्रेय जी के साथ गौ माता और कुत्ते का विशेष संबंध है। इसलिए इस दिन गाय और कुत्ते की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त को मनचाहा फल प्रदान करते हैं।

दत्तात्रेय जयंती 2024 तिथि और मुहूर्त (Dattatreya Jayanti 2024)
- तिथि प्रारंभ: 14 दिसंबर 2024, सायं 4:58 बजे।
- तिथि समाप्त: 15 दिसंबर 2024, दोपहर 2:31 बजे।
- मुख्य रूप से दत्तात्रेय जयंती 14 दिसंबर को मनाई जाएगी।
पूजा विधि (Dattatreya Jayanti Puja Vidhi)
1. सूर्योदय से पहले उठकर गंगा स्नान करें। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
2. भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।
3. भगवान दत्तात्रेय की पंचोपचार विधि से पूजा करें।
4. उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लें और व्रत रखें।
5. पूजा के दौरान "दत्तात्रेय मंत्र" का जाप करें और अवधूत गीता या जीवन मुक्ति गीता का पाठ करें।
दत्तात्रेय जयंती का महत्व
भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र थे। माता अनुसूया की साधना और परीक्षा के फलस्वरूप त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) ने संयुक्त रूप से दत्तात्रेय रूप में अवतार लिया।
इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा से पापों का नाश होता है, और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। भगवान दत्तात्रेय के बताए गए मार्ग पर चलने से जीवन में शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
दत्तात्रेय भगवान के प्रमुख मंदिर
भारत में दत्तात्रेय जी के मुख्य मंदिर गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में स्थित हैं। जयंती के अवसर पर इन मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं।
भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु हैं, जिनकी पूजा करने से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सुगम होता है। दत्तात्रेय जयंती का पर्व भक्ति और ज्ञान का प्रतीक है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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