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Dattatreya Jayanti Katha: जब त्रिदेवों ने रखी सती अनसूया से निर्वस्त्र भोजन कराने की शर्त, पढ़ें ये पौराणिक कथा
Dattatreya Jayanti Katha: पंचांग के अनुसार, हर साल मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस साल दत्तात्रेय जयंती 26 दिसंबर, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन उनके जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा का पाठ करने का विधान है।
गौरतलब है कि भगवान दत्तात्रेय ऋषि अत्रि और देवी अनुसूया के पुत्र थे। ये त्रिदेव ब्रह्माजी, भगवान विष्णु और भोलेनाथ के आशीर्वाद के साथ पैदा हुए थे। आइये दत्तात्रेय जयंती के मौके पर इस व्रत कथा का पाठ करते हैं।

भगवान दत्तात्रेय के जन्म की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि अत्रि मुनि की पत्नी अनुसूया के सतीत्व की महिमा तीनों लोकों में होने लगी। ये देखकर माता पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती भी अपने पतिव्रता धर्म पर अभिमान हुआ और सती अनुसूया की परीक्षा लेने की योजना बनाई। तीनों देवियां अपने अपने पति से अनुरोध करने लगी। तब ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव ब्राह्मण के वेश में महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे। उस समय पर महर्षि अत्रि अपने घर पर नहीं थे।
सती अनसूया उनके सत्कार के लिए पास पहुंची। तब ब्राह्मण के रूप में आये त्रिदेवों ने उनके सामने एक विचित्र शर्त रखी। तीनों देवताओं ने कहा कि यदि वह निर्वस्त्र होकर भोजन कराएंगी तभी वो उनका आतिथ्य स्वीकार करेंगे। उनकी ये शर्त सुनकर माता परेशान हो गयी।

उन्होंने अपने तपोबल से इन ब्राह्मणों की सत्यता जान ली। इसके बाद सती अनसूया ने भगवान विष्णु और अपने पति अत्रि का स्मरण किया और कहा कि यदि उनका पतिव्रता धर्म सत्य है तो ये तीनों ब्राह्मण 6 माह के शिशु बन जाएं। अनसूया की दिव्य शक्ति से त्रिदेवों को शिशु बना दिया। शिशु का रूप लेते ही तीनों देव रोने लगे। तब अनसूया ने उन्हें अपनी गोद में लेकर दुग्धपान कराया और उन तीनों को पालने में रख दिया।
माता पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती अपने पतियों के वापस न लौटने की वजह से परेशान हो उठीं। ऐसे में नारद जी ने उन्हें पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। तीनों देवियों को अपने किये पर पछतावा होने लगा। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। वो तीनों धरती पर सती अनसूया के पास गयी और उनसे क्षमा मांगी। साथ ही उन्होंने अपने पतियों को मूल रूप में लाने का आग्रह किया। तब अनसूया ने अपने तपोबल से त्रिदेवों को शिशु रूप से फिर से उनके पूर्व रूप में बदल दिया। माता अनसूया के इस पूरे प्रकरण से प्रसन्न हुए त्रिदेवों ने उन्हें वर मांगने के लिए कहा। तब माता ने उन तीनों देवों को पुत्र स्वरूप में पाने का वर मांगा। त्रिदेव ये वरदान देकर अपने धाम चले गए। बाद में माता अनसूया के गर्भ से भगवान विष्णु दत्तात्रेय, भगवान शिव दुर्वासा और ब्रह्मा चंद्रमा के रूप में जन्मे। एक अन्य कथा के अनुसार ये भी माना जाता है कि वर प्राप्ति के बाद माता अनसूया के गर्भ से त्रिदेव के एकल स्वरूप में भगवान दत्तात्रेय प्रकट हुए। इस वजह से भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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