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मौत से मत डरो, जीना शुरू करो
हम लगातार अमरत्व को खोजते रहते हैं। हम हमेशा ज्यादा सालों तक जीने, असीमित अवसर प्राप्त करने और जिंदगी पर पूरा नियंत्रण करने के सपने देखते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे पास समय बहुत कम है और खुद से परे हमारा अन्य चीजों पर कोई नियंत्रण नहीं है। जो लोग मनोवैज्ञानिक की मदद लेते हैं उनमे सबसे ज्यादा वे लोग होते हैं जिन्हे मृत्यु का भय सताता है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हर किसी को कहीं न कहीं मरने का डर सताता है।
मृत्यु के इस भय के कारण हम मे से बहुत से लोग चिंतित, भयभीत, पीड़ित और चित्तभर्मित से रहते हैं और अपनी अधिकतर ऊर्जा इससे लड़ने में ही गवा देते हैं। ये लोग इस भय से मुक्ति पाने के अलग अलग तरीके अपनाते हैं। कुछ लोग यह सोचकर इसे नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं कि मृत्यु तो अभी दूर है और वे बेपरवाह आगे बढ़ते हैं। कुछ लोग जीवन में अच्छा नाम और प्रसिद्धि पाना चाहते हैं ताकि मरने के बाद भी लोग उन्हें याद रखें। अन्य लोग ज्यादा जीने के लिए अपने शरीर और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के अनेकों उपाय करने के बावजूद भी अनेक लोग यह चिंता करते हैं कि मृत्यु के बाद क्या होगा। चूँकि हमने अभी तक मृत्यु का सामना नहीं किया किया है इसलिए यह जानना जरुरी है कि हम मृत्यु से क्यों डर रहे हैं। गहरे मनोवैज्ञानिक आत्मनिरीक्षण से पता चला है कि लोग मृत्यु से इसलिए डरते हैं क्यों कि उन्हें जिंदगी में कुछ अच्छा नजर नहीं आता और जिंदगी का कोई मतलब उन्हें समझ नहीं आता है। नतीजन ये लोग अफसोस, अपराध और क्रोध की भावनाओं से घिरे रहते हैं। आपके मरने के बाद होंगी ये पांच अद्भुत चीजे
हम अफसोस और पश्चाताप महसूस करते हैं क्यों हम अपने अंदर निहित क्षमता को पल्लवित नहीं होने देते और इसे बहार नहीं आने देते। जन्म के समय हम एक बीज के सामान होते हैं और जीवन का उद्देश्य आगे बढ़ना, विकास करना और वो सब अच्छा करना है जो जितना अच्छा हम कर सकते हैं। हममें से बहुत से लोग जीवन कि इस सच्चाई को नहीं समझ पाते हैं और और इस कारण हमारी प्रगति अवस्र्द्ध हो जाती है। हम संघर्ष, बुरे अनुभव, अहंकार और संकोच में डूबे रहते हैं और इसलिए जिंदगी को अपना 100 फीसदी नहीं दे पाते हैं।
जब हम अपने प्रियजनों को पूरा प्यार नहीं दे पाते हैं तो हम अपने आप को दोष देते हैं। आपसी अंतरंग संबंधों में कुछ लोग दूसरों से ज्यादा लेते हैं लेकिन खुद बहुत कम दे पाते हैं। शायद काफी लम्बे समय तक यह सुविधाजनक और अच्छा लगे लेकिन अंतर्मन में हम जरूर ठगा सा महसूस करते हैं। एक दिन हमारी अंतर आत्मा हमें बुराई से परे करती है और तब हमें अपनी गलतियां महसूस होती हैं और हम असहाय महसूस करते हैं ।
इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी के सामने अपनी भावनाएं प्रदर्शित नहीं करते लेकिन दूसरे व्यक्ति को वे बहुत कुछ दे देते हैं। इससे असंतोष और गुस्सा पैदा होता है। वे अपने इस गुस्से को दबाने कि कोशिश करते हैं लेकिन दूसरों से उनके वास्तविक संबंध टूट जाते हैं। अफसोस, अपराध और क्रोध हमारे जीवन को अर्थहीन बना देते हैं। जीवन कि इस बर्बादी को रोकने के लिए लोग आम तौर पर जीवन पर डटे रहना चाहते हैं।
दुर्भाग्य से मुक्ती पाने का यह है सबसे अच्छा तरीका
मौत के डर से मुक्ति पाने के लिए हमें जीवन में हमारे अस्तित्व के महत्त्व खोजने की जरूरत है। यह जरुरी है कि हर प्रकार कि बुराई से लड़ने के लिए हम अपने आप को पहचाने और आत्म शक्ति का आंकलन करें। अपनी क्षमताओं और लक्ष्यों के बारे में याद कर हम अपने आपको जान सकते हैं। हमें हर किसी को नहीं मानना चाहिए लेकिन रिश्तों में आदान - प्रदान जरूरी है। जैसे हमें जरुरत है वैसे ही हमारे नजदीकी लोगों को भी प्यार , देखभाल और ध्यान कि आवश्यकता है। यदि हम उनसे नाराज भी हैं तो बिना उनको हर्ट किये और बिना तकलीफ पहुंचाए उनसे बातचीत जरूरी है।
अपने अस्तित्व का मतलब समझकर हम संकरी मानसिकता से दूर जा सकते हैं। यदि हम यह मतलब समझ लेते हैं और अपने अहंकार से पार पा लेते हैं तो मृत्यु की संभावना हमें नहीं डरा पाएगी। शायद हम जीवन को एक मुक्तिरूपी साहस समझते हैं बल्कि यह अपार संभावनाओं से भरा हुआ है।



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