Latest Updates
-
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय
Arafat Ki Dua: बकरीद के मौके पर जानें अराफात क्या है और इस दिन कौन सी दुआ पढ़ी जाती है
Arafat Ki Dua: अराफात (Arafat) इस्लाम धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान और अवधारणा है, जो हज (इस्लाम का पवित्र तीर्थयात्रा) के दौरान एक प्रमुख भूमिका निभाती है। अराफात एक दिन का होता है। यह इस्लामी कैलेंडर के जूल-हिज्जा महीने के नौवें दिन मनाया जाता है।
अराफात के दिन हज यात्री मक्का के पास मैदान-ए-अराफात में इकट्ठा होते हैं और दुआ करते हैं। यह दिन हज यात्रा का दूसरा दिन होता है और इसके बाद ईद-उल-अधा मनाई जाती है। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि अराफात क्या है, इसका क्या महत्व है और इस दिन कौन सी दुआ पढ़ी जाती है:

अराफात का महत्व (Day of Arafat)
हज का प्रमुख रुक्न: अराफात का दिन, जिसे यौम-उल-अराफा (Day of Arafat) भी कहा जाता है, हज का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यह इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार ज़ुल-हिज्जा के 9वें दिन आता है। हज के लिए मक्का आने वाले सभी अकीदतमंदों को इस दिन अराफात के मैदान में मौजूद होना जरूरी होता है। एक हदीस के अनुसार, "हज, अराफात है" (हज अराफात के बिना अधूरा है)।
वाक़िफ़ा-ए-अराफात: (Standing at Arafat)
हज के दौरान, हाजियों (हज करने वाले) को अराफात के मैदान में दोपहर से लेकर सूर्यास्त तक रुकना पड़ता है। इसे वाक़िफ़ा-ए-अराफात (Standing at Arafat) कहते हैं। इस समय, हाजी इबादत (उपासना), तौबा (पश्चाताप), और दुआ (प्रार्थना) में करने में बिताते हैं।
माउंट अराफात (जबल-ए-रहमत): (Mount of Mercy)

अराफात के मैदान में एक पहाड़ है जिसे माउंट अराफात या जबल-ए-रहमत (Mount of Mercy) कहते हैं। इस स्थान का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यह माना जाता है कि इसी स्थान पर पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपना आखिरी ख़ुत्बा (विदाई भाषण) दिया था।
तौबा करना:
अराफात का दिन आत्मनिरीक्षण और तौबा का दिन होता है। हाजी यहां अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अल्लाह से दुआ करते हैं। माना जाता है कि अराफात के दिन की दुआ और पश्चाताप अल्लाह के द्वारा विशेष रूप से स्वीकार की जाती है।
अराफात के दिन कौन सी दुआ पढ़ी जाती है (Dua on the day of Arafat)
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٍ
"ला इलाहा इल्लल्लाहू, वाहदहू ला शरीका लहू, लहूल मुल्क वल-हूल हम्द, व-हूवा अला कुल्ली शैइन क़दीर"
अल्लाह के सिवा कोई (सच्चा माबूद) नहीं, वो अकेला है और उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए सारी बादशाही है और उसी के लिए सारी तारीफ है और वो हर चीज़ पर ख़ूब क़ुदरत रखता है।
Laa ilaaha ill-allaahu, waḥdahu laa shareeka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamdu, wa huwa ‛alaa kulli shay'in qadeer
None has the right to be worshiped except Allah, alone, without partner. To Him belongs sovereignty and all praise and He is over all things omnipotent.
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications