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कब किया जाएगा एकादशी का श्राद्ध? जानें सही तिथि और करने का तरीका, जिससे पितर होंगे प्रसन्न
Ekadashi Shradh 2025: हिंदू धर्म में पितृपक्ष श्राद्ध का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध किया जाता है और विधिवत पूजा-पाठ किया जाता है। कई लोग यह सवाल करते हैं कि एकादशी का श्राद्ध कब किया जाए, क्योंकि इस दिन व्रत का भी विधान है।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी के श्राद्ध की तिथि और विधि का पालन करने से पितरों की कृपा सहज ही प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं 2025 में एकादशी श्राद्ध की सही तिथि, महत्व और विधि।
कब है एकादशी का श्राद्ध?
वैसे तो हर एकादशी का विशेष महत्व होता है, लेकिन पितर पक्ष में आने वाली एकादशी का खास महत्व होता है। लोगों का सवाल है कि इस बार एकादशी का श्राद्ध कब है? बता दें कि पंचांग के अनुसार, इस बार 17 सितंबर 2025, दिन बुधवार को एकादशी का श्राद्ध किया जाएगा। इस दिन को इंदिरा एकादशी के रूप में भी जाना जाता है और भक्त इस दिन उपवास रखते हैं। इस दिन विधिपूर्वक श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

एकादशी श्राद्ध करने का सही तरीका
सुबह स्नान - प्रातःकाल स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करें।
व्रत एवं संकल्प - भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
पिंडदान व तर्पण - गंगा जल, तिल, पुष्प और कुशा से पिंडदान व तर्पण करें।
श्राद्ध भोज - ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें।
पारायण व पाठ - विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें।
दान-पुण्य - जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
ये है एकादशी श्राद्ध मुहूर्त
अब ये जानना भी जरूरी है कि एकादशी श्राद्ध का शुभ मुहूर्त कब है? 17 सितंबर को एकादशी का श्राद्ध है जिसका शुभ मुहूर्त 16 तारीख की रात को 12 बजकर 21 मिनट से शुरू हो जाएगा जो 17 सितंबर को 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। श्राद्ध का मुहूर्त 17 सितंबर को दोपहर को 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
पितरों को प्रसन्न करने का महत्व
एकादशी के दिन श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। माना जाता है कि इस दिन श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही परिवार में धन, सुख और समृद्धि का आगमन होता है। संतान सुख और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में इस दिन श्राद्ध करने की मान्यता और भी ज्यादा बढ़ जाती है।



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