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Ganesh Chaturthi 2025 : बप्पा को 10 दिन भोग में क्या-क्या चढ़ाया जाता है?
Ganesh Chaturthi 2025 : गणेश चतुर्थी हिन्दू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान गणेश की उपासना और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन से शुरू होकर दस दिनों तक गणपति बप्पा की पूजा की जाती है। हर दिन की भक्ति और भेंट का विशेष महत्व है। सही तरीके से और निर्धारित भेंट चढ़ाने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, परेशानियों और विघ्नों का नाश होता है और नए अवसरों के द्वार खुलते हैं। आइए जानते हैं कि गणेश चतुर्थी के 10 दिन बप्पा को क्या भोग लगाने से घर में खुशियां ही खुशियां आती है।

पहला दिन: 21 दुर्वा
गणेश जी को पहले दिन 21 दुर्वा (दुर्वा घास) चढ़ाएं। यह माना जाता है कि दुर्वा गणपति जी को अत्यंत प्रिय है। इसे चढ़ाने से सारे कष्ट दूर होते हैं और जीवन में शांति और संतुलन आता है।
दूसरा दिन : शमी के पत्ते
दूसरे दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करें। शमी के पत्ते शत्रु और नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाने का काम करते हैं। इसे अर्पित करने से आपके जीवन में सुरक्षा, साहस और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
तीसरा दिन : गुड़ और चने
तीसरे दिन गणेश जी को गुड़ और चने चढ़ाना चाहिए। गुड़ मीठा होने के कारण जीवन में सुख और प्रेम को बढ़ाता है, वहीं चने स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्रतीक हैं। इस भेंट से जीवन में खुशहाली और सौभाग्य आता है।
चौथा दिन : मोदक
गणेश जी को चौथे दिन मोदक अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मोदक उनके प्रिय भोगों में से एक है। इसे चढ़ाने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है और मानसिक शांति मिलती है।
पांचवां दिन : सिंदूर और पुष्प
पांचवें दिन गणेश जी को सिंदूर और पुष्प अर्पित करें। सिंदूर शक्ति और संजीवनी का प्रतीक है। पुष्प अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सौहार्द और प्रेम बढ़ता है।
छठा दिन : नारियल
छठे दिन नारियल चढ़ाना चाहिए। नारियल शुद्धता और सच्चाई का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से बुद्धि का विकास होता है और जीवन में नई राहें खुलती हैं।
सातवां दिन : केला या केले के पत्ते
सातवें दिन गणेश जी को केला या केले के पत्ते अर्पित करें। यह समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। घर में हर तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं।
आठवां दिन : सेब और अनार
आठवें दिन गणेश जी को सेब और अनार चढ़ाएं। फल जीवन में समृद्धि, तरक्की और स्वास्थ्य का प्रतीक हैं। इनका भोग अर्पित करने से आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत होती है।
नवां दिन : बेसन के लड्डू
नवें दिन बेसन के लड्डू चढ़ाएं। लड्डू गणपति जी के प्रिय हैं। इसे अर्पित करने से आरोग्य और सुख का आर्शीवाद मिलता है।
दसवां दिन : पंचामृत से स्नान
दसवें दिन गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण होता है। यह स्नान शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से स्वास्थ्य, भाग्य और मानसिक शांति मिलती है।
इस प्रकार, गणेश चतुर्थी के दस दिनों तक की गई पूजा और भेंट जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता लाती है। हर दिन की भक्ति और उचित भेंट से विघ्नों का नाश होता है और भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है।



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