Latest Updates
-
अमरनाथ गुफा में पिघला तो फ्रिज में दिखा 'बाबा बर्फानी' का शिवलिंग? वायरल वीडियो देख लोग रह गए हैरान -
एक कली कच्चा लहसुन खाकर दिन की शुरुआत करती हैं सोहा अली खान, जानें खाली पेट गार्लिक खाने के 5 जबरदस्त फायदे -
पिृत दोष से मुक्ति के लिए आज आषाढ़ अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट -
कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, अधूरी रह जाएगी पूजा -
Kriti Sanon ने करवाए अपने अंडे फ्रीज! जानें किस उम्र में ये कराना बेहतर और Egg Freezing फायदे-नुकसान? -
कब है आषाढ़ अमावस्या? इस दिन इन 4 राशियों पर मंडरा रहा संकट, कहीं आपकी राशि भी तो लिस्ट में नहीं? -
Corona Alert: सिंगर कुमार सानू के बेटे को हुआ कोविड, आंध्र प्रदेश में मिले सबसे ज्यादा मरीज, जानें लक्षण -
स्कूल टिफिन के लिए 15 मिनट में तैयार करें सॉफ्ट और स्पंजी सूजी के अप्पे, नोट कर लें आसान रेसिपी
Gopashtami 2024: भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए सबसे पावन दिन है गोपाष्टमी, नोट करें तिथि-मुहूर्त व पूजा
Gopashtami 2024 Kab Hai: हिंदू पंचांग के अनुसार, गोपाष्टमी का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान कृष्ण को समर्पित है और इस दिन गायों और उनके बछड़ों की पूजा करने का विशेष महत्व है, जो श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
गोपाष्टमी विशेष रूप से मथुरा-वृंदावन के बृज क्षेत्र में मनाई जाती है, लेकिन अब पूरे देश में इस पर्व को भक्तों द्वारा मनाने का चलन बढ़ गया है। इस वर्ष गोपाष्टमी 9 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी, जो श्रद्धा और आस्था का यह पर्व और भी खास बना देगी।

गोपाष्टमी 2024 शुभ मुहूर्त
इस साल गोपाष्टमी 8 नवंबर की रात 11:56 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को रात 10:45 बजे समाप्त होगी। पूजा के शुभ मुहूर्त के अनुसार, इस दिन सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक का समय विशेष रूप से अनुष्ठानों के लिए उत्तम माना गया है। इस दौरान भगवान कृष्ण और गायों की पूजा की जाती है, जो इस दिन के मुख्य अनुष्ठानों का हिस्सा है।
गोपाष्टमी पूजा कैसे करें
गोपाष्टमी के अनुष्ठान के लिए, भक्तों को सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद स्नान कर भगवान कृष्ण और गौ माता की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। इन मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराकर चंदन और कुमकुम का तिलक किया जाता है। फिर घी का दीपक जलाकर तुलसी के पत्ते, फल, फूल, और घर की बनी मिठाई अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है।
जिन लोगों के पास गाय हैं, वे उन्हें हरी घास, गुड़, और रोटी खिलाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं। जिनके पास गाय नहीं है, वे गौशालाओं में जाकर गायों की सेवा और दान कर सकते हैं। शाम को भक्त मंदिरों में एकत्रित होते हैं, भगवान कृष्ण के भजन-कीर्तन करते हैं और आध्यात्मिक माहौल में डूब जाते हैं।
गोपाष्टमी क्यों मनाते हैं?
गोपाष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में गोवंश के प्रति श्रद्धा और भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति को दर्शाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने पहली बार गोरक्षण (गायों की रक्षा) का दायित्व संभाला था। बचपन से ही गौमाता के प्रति उनका विशेष लगाव था और वे ग्वालबालों के साथ गायों को चराने जाते थे। गोपाष्टमी के दिन भगवान कृष्ण और गायों की पूजा की जाती है, जिसे शुभ और फलदायी माना जाता है। इस पर्व में गौसेवा और गौदान का विशेष महत्व है, जो न केवल पर्यावरणीय संतुलन को दर्शाता है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी इसे पुण्यदायी माना गया है।
गोपाष्टमी पर्व की महत्ता
गोपाष्टमी का यह पवित्र पर्व पूजा, सेवा, और भक्ति का प्रतीक है। यह भगवान कृष्ण, गौ माता और भक्तों के बीच एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करता है। पूरे देश में उत्साहपूर्वक मनाए जाने वाला यह त्यौहार हिंदू संस्कृति में निहित सेवा और भक्ति के महत्व को दर्शाता है, जिसमें सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न अनुष्ठानों में भाग लेकर लोग अपने आराध्य को नमन करते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications