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Haj 2023: क्या आपको पता है हज और उमरा के बीच अंतर, जानिए जरूरी बातें
हर मुसलमान की चाहत होती है कि वो अपनी जिंदगी में एक बार हज जरूर करें, वो एक बार काबा के सामने जाकर दुआ के लिए हाथ जरूर ऊपर करे, इसके लिए दुनिया के हर मुसलमान की कोशिश होती है कि वो कम से कम उमराह तो कर ही ले। जो पर जाने के लिए सक्षम नहीं होते हैं वो मक्का और मदीना को देखने और दुआ के लिए उमराह जाते है। लेकिन हज और उमराह में अंतर होता है। आइये जानते है इसके बारें में -

हज और उमरा के बीच अंतर
-उमराह एक मिनी पिलग्रिमेज है। ये इस्लाम का पिलर नहीं है, बल्कि काबा को देखने और वहां जाकर अल्लाह पाक से दुआ और माफी के लिए जाते हैं।
-उमराह इस्लामी कैलेंडर के दौरान किसी भी समय किया जा सकता है, सिवाए एक महीने के, हज साल में सिर्फ एक बार केवल धुल हिज्जा के महीने के दौरान किया जा सकता है।
-जब मुसलमान उमराह करते हैं तो वो अपना तवाफ़ और सई करते हैं।
-तवाफ का अर्थ है काबा के चारों ओर गोल घेरे में चक्कर लगाना। एक तवाफ़ सात चक्करों से मिलकर बना होता है, जिनमें से हर चक्कर काले पत्थर हजरें अस्वद पर शुरू और खत्म होता है।

-आप अल्लाह (SWT) से अपने गुनाहों की माफी मांहने और अपनी स्पिरिचुअल जर्नी की शुरुआत करने के लिए अल्लाह पाक का शुक्रिया अदा करने के लिए उमराह किया जाता है।
-अपना तवाफ करने के बाद , मुसलमान सई करते हैं, सफा और मारवा की दो पहाड़ियों के बीच चलना और दौड़ते हैं।
-मुसलमान सफ़ा पर सई शुरू करेंगे और मारवा की ओर तब तक चलेंगे जब तक कि आपको हरा मार्कर दिखाई न दे, जिस प्वाइंट पर आप अगले हरे मार्कर तक चलेंगे, और तब तक चलते रहेंगे जब तक आप मारवा तक नहीं पहुंच जाते। ये एक गोल को पूरा करता है।
-इसके बाद आप अपना दूसरा चक्कर पूरा करने के लिए सफा लौटेंगे। सफ़ा और मारवा के बीच कुल सात चक्कर लगाने के बाद आपकी सई पूरी हो जाती है।
-ये पैगंबर इब्राहिम की बीवी हाजिरा (AS) की याद में और अपने बेटे पैगंबर इस्माइल (एएस) के लिए पानी की तलाश में रेगिस्तान में उनके संघर्ष की याद में एक जरूरी रिचुअल है। सई में चल रहे संघर्ष का प्रतीक है जिसका मुसलमान अपने पूरी लाइफ में सामना करते हैं, जैसा कि हाजिरा (एएस) ने खुद अनुभव किया।
-एक बार जब सई पूरी हो जाती है, तो पुरुषों के बाल कटवाए जाते हैं या सारे बाल मुंडवाए जाते हैं, जबकि महिला अपने बालों को अपनी उंगलियों की लंबाई तक बाल काटती हैं।
-ये आपके उमरा के पूरा होने का साइन है।

-वहीं हज करने वालों के लिए स्पिरिचुअल जर्नी काफी लंबी होती है।
-हज और उमराह के बीच अन्य अंतर ये है कि हाजी मीना, अरफा और मुजदलिफा जाते हैं । वे शैतान को पत्थर मारने का काम करते हैं और मक्का में ईद अल-अदहा बिताते हैं, वहां पर कुर्बानी देते हैं।
-धुल हिज्जा के मुबारक दिनों में अपनी जकात और सदका अदा करें।
-ईद के लिए समय पर अपनी कुरबानी देना न भूलें !



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