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Hanuman Jayanti 2026: आरती कीजै हनुमान लला की...हनुमान जयंती पर यहां से पढ़कर गाएं बजरंगबली की आरती
Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi: यह दिन हनुमान जी की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इसे हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। इस शुभ मौके पर देशभर के हनुमान मंदिरों में सुंदर कांड, भजन-कीर्तन और भंडारे का भव्य आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि हनुमान जयंती पर सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हिंदू धर्म में पूजा के बाद आरती करने का विधान है। ऐसे में, हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी या तेल का दीपक जलाकर, फूल अर्पित करके भक्ति भाव से आरती करनी चाहिए। आइए, पढ़ते हैं हनुमान जी की आरती, जिससे बजरंगबली अत्यंत प्रसन्न होते हैं -

हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics)
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
हनुमान जी के मंत्र (Hanuman Ji Mantra)
'ॐ हं हनुमते नम:।'
'ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय'
'सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।'
हनुमान मूल मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः॥
रुद्र हनुमान मंत्र
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय।
सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा॥
हनुमान गायत्री मंत्र
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
पंचमुखी हनुमान मंत्र
ऊं नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा"
हं हनुमंते नम:"
ऊं नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा
ऊं हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट



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