Hanuman Jayanti Sanskrit Wishes: हनुमान जयन्त्यां शुभं भवतु.. इन श्‍लोकों से दें हनुमान जयंती की बधाई

Hanuman Jayanti Sanskrit Wishes : हनुमान जयंती हनुमान जी के भक्तों के लिए अत्यंत पावन पर्व है, जिसे साल में दो बार मनाया जाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उत्तर भारत में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन 'हनुमान जन्मोत्सव' मनाया जाता है। वहीं, दक्षिण भारत में मान्यता है कि चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जी को पुनः जीवन और अद्भुत शक्तियां प्राप्त हुई थीं, इसलिए इस दिन 'हनुमान जयंती' मनाई जाती है। इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयंती 12 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। यह पर्व भक्तों में भक्ति, शक्ति और सेवा की भावना जाग्रत करता है, और संकटों से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की कृपा का प्रतीक माना जाता है।

हनुमान जयंती पर देशभर के हनुमान मंदिरों में भव्य पूजा होती है। भक्त हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंगबाण का पाठ करते हैं। इस अवसर पर आप संस्कृत श्लोक, मंत्र, व्हाट्सऐप मैसेज या जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों को "हनुमान जयन्त्यां शुभं भवतु!" कहकर शुभकामनाएं दे सकते हैं।

Hanuman Jayanti Sanskrit Wishes

हनुमान जयन्त्यां शुभं भवतु (Hanuman Jayanti Sanskrit Wishes)

1) भगवतः हनुमानस्य दिव्यः सन्निधिः

भवन्तं सफलतां सिद्धिं च प्रति मार्गदर्शनं करोतु।

हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं !

2. अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं

दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं

रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।

3. श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।

4. बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता।

अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्।।

5. हनुमानजयन्ती भक्त्या प्रार्थनापूर्वक आचरामः।

तस्य अचञ्चला श्रद्धया अस्माकं जीवनं स्पृशतु।

6. अस्मिन् हनुमत् जयन्ती पर बलं साहसं च कामना।

भगवान् हनुमानः सुखं शान्तिं च ददातु।

7) ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि।

तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

8) भगवान् हनुमानः यस्य प्रतीकं भवति तया आनन्देन आध्यात्मिकवृद्ध्या च भवतः जीवनं पूर्णं भवतु।

9) श्री हनुमते नमः।
हनुमज्जयंती शुभाशयाः।
सर्वे भवन्तु सुखिनः, रोग रहितं जीवनं लभन्ताम्।
जय बजरंगबली!

आप सभी को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!

10) पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप।।

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