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हरेला पर्व 2023: हरेला के साथ उत्तराखंड में शुरु होगा सावन, क्यों अलग होता है पहाड़ियों का सावन जानें यहां
Harela 2023 Date: हिंदी पंचांग के अनुसार सावन की शुरुआत 4 जुलाई से हो गई है, लेकिन उत्तराखंड में अभी सावन की शुरुआत नहीं हुई है। पहाड़ी इलाकों में उत्तराखंड में सावन की शुरुआत 16 जुलाई को हरेला पर्व के साथ होगी। उत्तराखंड के सावन का पहला सोमवार 17 जुलाई 2023 को होगा।
इस साल उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला 16 जुलाई 2023 रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। देवभूमि उत्तराखंड को शिव भूमि भी कहा जाता है।

हरेला का महत्व
हरेला पर्व प्रकृति से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड में हरेला पर्व से सावन मास की शुरुआत मानी जाती है। सावन मास के हरेला पर्व का विशेष महत्व है सावन भगवान शिव का प्रिय मास है और उत्तराखंड को शिव भूमि भी कहा जाता है।
इस पर्व को शिव पार्वती के विवाह के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि हरेला जितना बड़ा होगा, कृषि में उतना ही फायदा देखने को मिलेगा। वैसे तो हरेला को हर घर में बोया जाता है लेकिन कुछ पहाड़ी इलाको में सामूहिक रूप से स्थानीय ग्राम देवता के मंदिर में भी हरेला बोई जाती है।

7 किस्म का अनाज उगाया जाता है
रेला का अर्थ हरियाली से है और इस पर्व की तैयारियां 9-10 दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। साथ ही 7 किस्म का अनाज उगाया जाता है। जिसमें जौ, गेहूं, मक्का, गहत, सरसों, उड़द और भट्ट को रिंगाल की टोकरी में रोपित किया जाता है। इसके लिए रिंगाल की टोकरी में एक परत मिट्टी की बिछाई जाती है और इसमें अन्न के बीज डाले जाते हैं। बाद में मिट्टी डाली जाती है और फिर से बीज डाले जाते हैं। इस प्रकिया को करीब पांच से छ बार दोहराया जाता है।
इसके बाद 10वें दिन हरेला त्योहार के दिन इसे काटा जाता है। फिर घर के मुखिया इसका पूजन करते हैं और इसे हरेला पतीसना कहा जाता है। फिर यह देवता को अर्पित किया जाता है और घर की बुजुर्ग महिला सभी सदस्यों को हरेला लगाती है। इस मौके पर मंगल गीत भी गाए जाते हैं।
उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल का सावन अलग क्यों होता है?
देश के उत्तर मध्य और पूर्वी भागों में पुर्णिमा के बाद नए हिन्दू महीने की शुरुआत होती है। इस पंचांग व्यवस्था में ,उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश आते हैं। इसलिए उनके सावन पूर्णिमा से शुरू हो कर पूर्णिमा के आस पास खत्म होते हैं। नेपाल, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र, हिमाचल के कुछ हिस्सों में सौर पंचांग के अनुसार महीने शुरू व खत्म होते हैं। अर्थात जब सूर्य भगवान एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करते हैं। उत्तराखंड और नेपाल में उस दिन से महीना शुरू और ख़त्म माना जाता है। सूर्य की राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। प्रतिमाह संक्रांति 15 या 16 या 17 तारीख के आस पास पड़ती है। इसलिए हमेशा उत्तराखंड का सावन का महीना 16 या 17 जुलाई के आस पास से 15 , 16 अगस्त में ख़त्म हो जाता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। ज्यादा जानकारी के लिए किसी धार्मिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञों संपर्क करें।



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