Holi Faag Geet: आज बिरज में होरी रे रसिया... राधा-कृष्ण के प्रेम के रंगों में सराबोर फाग गीत, नोट करें लिरिक्स

Holi Faag Geet 2026: फाल्गुन का महीना आते ही हवाओं में अबीर-गुलाल के साथ-साथ डफ और मंजीरे की थाप गूंजने लगती है। इस साल 4 मार्च 2026 को होली मनाई जाएगी। होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि सुरों का भी उत्सव है, और जब बात ब्रज की होली की हो, तो 'फाग' और 'रसिया' के बिना उत्सव की कल्पना भी नहीं की जा सकती। राधा-कृष्ण के प्रेम और गोपियों की ठिठोली से सराबोर ये लोकगीत सदियों से हमारी परंपरा का हिस्सा रहे हैं।

आज भी जब कान्हा की नगरी में "आज बिरज में होरी रे रसिया" की गूंज सुनाई देती है, तो हर भक्त का मन नाचने को मजबूर हो जाता है। अगर आप भी इस होली अपनी टोली के साथ इन पारंपरिक गीतों को गाना चाहते हैं, तो हमने आपके लिए तैयार किया है टॉप 12 लोकप्रिय फाग गीतों का संग्रह। आइए, सुरों के गुलाल में भीगते हैं और नोट करते हैं इन कालजयी गीतों के शब्द-दर-शब्द लिरिक्स (Lyrics)।

होली के फाग, जिनके बिना अधूरा है पर्व

1. आज बिरज में होरी रे रसिया

यह ब्रज का सबसे लोकप्रिय और 'हस्ताक्षर' गीत है।

लिरिक्स:
आज बिरज में होरी रे रसिया।
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥
इत ते आए कुंवर कन्हैया, उत ते श्री राधा प्यारी।
केसर रंग छिड़क रहे रसिया, भर-भर मारत पिचकारी॥
आज बिरज में होरी रे रसिया...

2. होली खेल रहे बांके बिहारी

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन का यह बेहद ऊर्जावान गीत है।

लिरिक्स:
होली खेल रहे बांके बिहारी, आज रंग बरसे।
आज रंग बरसे, हाए नीलम बरसे॥
झोली भर-भर गुलाल उड़ावे, मुख पर मल रहे केसर गारी।
होली खेल रहे बांके बिहारी...

3. फागुन के दिन चार रे, होली खेल मना रे

यह गीत जीवन की नश्वरता और खुशी मनाने का संदेश देता है।

लिरिक्स:
फागुन के दिन चार रे, होली खेल मना रे।
बिन करताल पखावज बाजे, अणहद की झणकार रे॥
फागुन के दिन चार रे...

4. होली खेलन आयो रे श्याम, आज याने रंग में बोरो

यह राधा और सखियों की ओर से कान्हा को रंगने की चुनौती है।

लिरिक्स:
होली खेलन आयो रे श्याम, आज याने रंग में बोरो।
कोरे-कोरे कलश मंगाओ, ता में घोरो केसर रंग॥
होली खेलन आयो रे श्याम...

5. मोहे छेड़ो न नंद के लाल, होली है

गोपियों और कृष्ण के बीच की मधुर ठिठोली।

लिरिक्स:
मोहे छेड़ो न नंद के लाल, होली है।
बरजोरी न कर बनवारी, मोरी भीगे चुनर और चोली॥
मोहे छेड़ो न नंद के लाल...

6. बरसाने वाली की जय, जय बोलो राधा रानी की

बरसाने की लठमार होली का आनंद इस गीत में झलकता है।

लिरिक्स:
बरसाने वाली की जय, जय बोलो राधा रानी की।
राधा रानी की, प्यारी जू की स्वामिनी की॥
झूम-झूम के नाचो रे, आज होली है बरसाने की।
बरसाने वाली की जय...

7. ओरी सखी री, मेरो कान्हा बड़ा अनारी

कान्हा की शरारतों पर आधारित एक प्यारा लोकगीत।

लिरिक्स:
ओरी सखी री, मेरो कान्हा बड़ा अनारी।
मेरी नई चुनरिया रंग डारी, मार के पिचकारी॥
ओरी सखी री...

8. उड़े अबीर गुलाल, लाली छाई रे

यह गीत होली के माहौल और चारों तरफ फैले रंगों का वर्णन करता है।

लिरिक्स:
उड़े अबीर गुलाल, लाली छाई रे।
सखियां खेलें फाग, बहार आई रे॥
उड़े अबीर गुलाल...

9. होली आई रे कन्हाई, रंग छलके

पारंपरिक रसिया जो नाचने के लिए मजबूर कर देता है।

लिरिक्स:
होली आई रे कन्हाई, रंग छलके, सुना दे जरा बांसुरी।
बरसे गुलाल चारों ओर, भीगे मोरी अंगिया और चुलबुली॥
होली आई रे कन्हाई...

10. कान्हा की पिचकारी, मारे भर-भर के

होली के हुड़दंग और मस्ती को समर्पित।

लिरिक्स:
कान्हा की पिचकारी, मारे भर-भर के।
बच के जाना ओ गोरी, अब के होली में फँस गई रे॥
कान्हा की पिचकारी...

11.खेले मसाने में होरी ॥

(मुखड़ा)
खेले मसाने में होरी, दिगम्बर, खेले मसाने में होरी।
भूत पिशाच बटोरी, दिगम्बर, खेले मसाने में होरी ॥

(अंतरा - 1)
गोप ना गोपी श्याम ना राधा,
ना कोई रोक ना कौनो बाधा।
ना साजन ना गोरी, दिगम्बर,
खेले मसाने में होरी ॥

(अंतरा - 2)
नाचत गावत डमरू धारी,
छोड़े सर्प गरल पिचकारी।
पीटे प्रेत थपोरी, दिगम्बर,
खेले मसाने में होरी ॥

(अंतरा - 3)
भूतनाथ की मंगल होरी,
देख सिहाये बिरज की छोरी।
धन धन नाथ अघोरी, दिगम्बर,
खेले मसाने में होरी ॥

(समापन)
खेले मसाने में होरी, दिगम्बर, खेले मसाने में होरी।
भूत पिशाच बटोरी, दिगम्बर, खेले मसाने में होरी ॥

12. ब्रज फाग

मुखड़ा:
ब्रज में मचा है फाग, तू खेलन आजा नंदलाला।
खेलन आजा, खेलन आजा... तू खेलन आजा नंदलाला ॥

अंतरा - 1:
राधा रानी को संग में लाना,
रंगों से कर देंगे लाल, तू खेलन आजा नंदलाला।
ब्रज में मचा है फाग, तू खेलन आजा नंदलाला ॥

अंतरा - 2:
मैया यशोदा को संग में लाना,
गजब करेंगे धमाल, तू खेलन आजा नंदलाला।
ब्रज में मचा है फाग, तू खेलन आजा नंदलाला ॥

अंतरा - 3:
गोप-गोपियाँ संग में लाना,
रंगों की आयी बहार, तू खेलन आजा नंदलाला।
ब्रज में मचा है फाग, तू खेलन आजा नंदलाला ॥

अंतरा - 4:
चढ़ी गजब की मस्ती 'कमल सिंह',
तेरा करे इंतजार, तू खेलन आजा नंदलाला।
ब्रज में मचा है फाग, तू खेलन आजा नंदलाला ॥

गीत 2: बदलो ले लूँगी दारी के (ठिठोली भरा फाग)
यह गीत राधा रानी और गोपियों की ओर से कान्हा को दी जाने वाली प्रेमभरी चेतावनी है।

मुखड़ा:
अरे बदलो ले लूँगी दारी के, होरी का तोहे बड़ा चाव।
कहाँ जाएगा रसिया भाज, हाँ भाज... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

अंतरा - 1:
तू सुनले मेरे साँवरिया, यहाँ धर दे मुकुट और कांवरिया।
छलबलिया धोकेबाज, बदलो ले लूँगी दारी के...
होरी का तोहे बड़ा चाव, बड़ा चाव... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

अंतरा - 2:
नित ब्रिज गोपीन को छेड़त हो, मोसे अटपाती बानी बोलत हो।
तोहे नेक ना आवे लाज, बदलो ले लूँगी दारी के...
होरी का तोहे बड़ा चाव, बड़ा चाव... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

अंतरा - 3:
फस गयो आज जनाने में, तेरी नाई चलेगी बरसाने में।
यहाँ श्यामा जी को राज, बदलो ले लूँगी दारी के...
होरी का तोहे बड़ा चाव, बड़ा चाव... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

अंतरा - 4:
तेरे शीश चुनरिया धारेंगी, नैनन में अंजन बारेंगी।
तेरे मारूँगी गुलचा गाल, बदलो ले लूँगी दारी के...
होरी का तोहे बड़ा चाव, बड़ा चाव... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

अंतरा - 5:
तेरी मात यशोदा आवेगी, होरी को फगुआ लावेगी।
या ब्रज को यही रिवाज़, बदलो ले लूँगी दारी के...
होरी का तोहे बड़ा चाव, बड़ा चाव... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

अंतरा - 6:
अब क्यों दुबक रहियो रे लहंगा में, निकल मेरी सारी पे रंग डार।
बदलो ले लूँगी दारी के...
होरी का तोहे बड़ा चाव, बड़ा चाव... बदलो ले लूँगी दारी के ॥

Story first published: Sunday, March 1, 2026, 14:06 [IST]
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