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Holika Ki Prem Kahani: क्या आपने सुनी है हिरण्यकश्यप की बहन होलिका की प्रेम कहानी, बहुत दुखद था अंत
Holika Aur Eloji Ki Prem Kahani: भारतीय त्योहारों में होली का अपना विशेष स्थान है। होली की पूर्व संध्या में होलिका दहन किया जाता है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का महत्व बताता है। होली पर सिर्फ रंगों का महत्व नहीं है बल्कि होली से एक दिन पूर्व मनाये जाने वाले होलिका दहन का भी विशेष स्थान है।
पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी को होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन से जुड़ी कथा हम सभी जानते हैं। इस कथा के मुताबिक़, हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को प्रताड़ित किया और उसकी हत्या करने के लिए अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने के लिए कहा। होलिका के पास अग्नि में न जलने का वरदान था। मगर श्रीहरि विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को खरोंच तक नहीं आयी बल्कि इसके उलट होलिका उस अग्नि में जलकर भस्म हो गयी।

आज हम होलिका के जीवन से जुड़े उस पहलू पर नजर डालते हैं जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। यहां हम होलिका के प्रेम जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं। होलिका और इलोजी की अधूरी प्रेम कहानी के बारे में शायद ही आपने सुना होगा।
होलिका दहन 2024 का मुहूर्त (Holika Dahan Ki Timing)
होलिका दहन रविवार, मार्च 24, 2024 को
होलिका दहन मुहूर्त - 11:13 पी एम से 12:27 ए एम, मार्च 25
अवधि - 01 घण्टा 14 मिनट्स
रंगवाली होली सोमवार, मार्च 25, 2024 को
भद्रा पूँछ - 06:33 पी एम से 07:53 पी एम
भद्रा मुख - 07:53 पी एम से 10:06 पी एम
प्रदोष के दौरान होलिका दहन भद्रा के साथ
होलिका और इलोजी की प्रेम कहानी (Holika aur Iloji Ki Love Story)
पौराणिक कथा के अनुसार होलिका और इलोजी एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। होलिका और इलोजी प्रेम जीवन को वैवाहिक जीवन में बदलने का मन बनाया। होलिका और इलोजी के विवाह का शुभ मुहूर्त फाल्गुन पूर्णिमा की रात को निकली थी।
इधर भक्त प्रहलाद की श्री हरि भक्ति से परेशान होकर उसके पिता हिरण्यकश्यप ने अपने सुपुत्र भक्त प्रहलाद की बली देने का निर्णय लिया। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को एक वरदान प्राप्त था। जिसमें होलिका को अग्नि दहन नही कर सकता था। इस वरदान को सोचकर हिरण्यकश्यप ने फैसला किया कि होलिका भक्त प्रहलाद को अपने गोद में लेकर अग्नि की कुंड में बैठेगी। होलिका ने हिरणकश्यप की इस योजना का साथ देने के लिए मना कर दिया तो हिरण्यकश्यप ने होलिका और इलोजी के विवाह में व्यवधान डालने की बात कही और इलोजी को सजा देने की बात कही।
यह सुनकर होलिका बहुत मायूस हो गई और परेशान होकर अपने भाई की बात मान ली। विवाह से ठीक पहले ही होलिका अग्नि में जल गयी और उसकी मृत्यु हो गई। इससे उनकी प्रेम कहानी अधूरी रह गई। इस दुखद समाचार को सुनकर इलोजी को बहुत सदमा लगा। उसी समय उन्होंने निर्णय लिया कि वह कभी विवाह नहीं करेगा। इससे उनकी प्रेम कहानी अमर हो गयी। राजस्थान के कई क्षेत्रों में इलोजी की भाव भक्ति के साथ पूजा की जाती है। यही एक बड़ी वजह है कि नवविवाहित जोड़े को होलिका दहन के दर्शन करने से मना किया जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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