क्या नवरात्रि में अखंड ज्योति बुझना अपशकुन है? जानें क्या करें और इसका क्‍या मतलब है?

नवरात्रि का पर्व देवी मां की उपासना और साधना का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान भक्तजन नौ दिनों तक माता रानी की आराधना करते हैं और अपने घर या मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं। अखंड ज्योति का अर्थ है ऐसी ज्योति जो पूरे नौ दिनों तक बिना बुझी लगातार जलती रहे। यह मां दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन कई बार अनजाने में या परिस्थिति विशेष के कारण यह दीपक बुझ जाता है। ऐसे में भक्तों के मन में प्रश्न उठता है कि इसका क्या अर्थ होता है और इसे दोबारा कैसे प्रज्वलित करना चाहिए।

Is It Inauspicious if the Akhand Jyoti

अखंड ज्योति का महत्व

अखंड ज्योति जलाने का अर्थ है कि साधक का मन मां दुर्गा पर केंद्रित रहे और साधना बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो। ज्योति का निरंतर जलना श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। माना जाता है कि इस ज्योति की रोशनी से घर में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

अगर अखंड ज्योति बुझ जाए तो क्या करें?

घबराएँ नहीं और शांत रहें
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ज्योति का बुझ जाना कोई अपशकुन नहीं है। यह कई प्राकृतिक कारणों जैसे हवा का चलना, तेल का खत्म होना या बाती का सही न होना आदि से हो सकता है। ऐसे में मन में भय या संदेह पालना उचित नहीं है।

गंगाजल छिड़कें
ज्योति बुझ जाने के बाद उस स्थान को पवित्र करने के लिए गंगाजल छिड़कना चाहिए। इससे वातावरण शुद्ध हो जाता है और पूजा स्थल की पवित्रता बनी रहती है।

मां दुर्गा से क्षमा याचना करें
दोनों हाथ जोड़कर मां दुर्गा से प्रार्थना करें और क्षमा मांगें कि अनजाने में यह गलती हो गई। मां अपने भक्तों की भावनाओं को समझती हैं और सच्चे मन से की गई प्रार्थना को स्वीकार करती हैं।

दीपक को पुनः प्रज्वलित करें
बाती को ठीक से लगाकर और पर्याप्त घी या तेल डालकर दीपक को दोबारा जलाएं। दीपक को इस बार ऐसी जगह रखें जहाँ हवा का असर न हो और उसकी देखभाल होती रहे।

मंत्र उच्चारण करें
दीपक जलाने के बाद "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" या "ॐ दूर्गायै नमः" मंत्र का जप करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मन को शांति मिलती है।

अखंड ज्योति बुझने का क्या मतलब है?

प्राकृतिक कारण: अक्सर ज्योति बुझना केवल एक सामान्य घटना होती है, जिसका कोई नकारात्मक अर्थ नहीं होता।

सावधानी की कमी: कई बार तेल कम पड़ने या बाती सही न रखने से दीपक बुझ जाता है। यह हमें सतर्क रहने का संकेत देता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से: कुछ विद्वान मानते हैं कि यह भक्त को सतर्क रहने और अपने ध्यान को केंद्रित रखने का संदेश है। यानी पूजा-पाठ में लापरवाही न बरतें।

भय का कारण नहीं: धार्मिक ग्रंथों में कहीं भी इसे बड़ा दोष या अनिष्ट नहीं माना गया है। असली महत्व श्रद्धा, निष्ठा और भक्ति का है, न कि दीपक के लगातार जलते रहने का।

सावधानियां ताकि ज्योति न बुझे

- दीपक में पर्याप्त तेल या घी भरकर रखें।

- बाती को सही तरीके से गाड़ें ताकि वह बीच-बीच में डूबे नहीं।

- दीपक को ऐसी जगह रखें जहाँ हवा या पंखे का असर न हो।

- समय-समय पर दीपक की देखभाल करते रहें।

Story first published: Monday, September 22, 2025, 20:57 [IST]
Desktop Bottom Promotion