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Jagannath Rath Yatra: बेहद अनूठी है 'हेरा पंचमी' रस्म, क्रोधित मां लक्ष्मी तोड़ देती हैं जगन्नाथ जी का रथ
पूरे देश में लोकप्रिय और उत्साह के साथ मनाए जाने वाले जगन्नाथ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। तकरीबन 10 दिन चलने वाले इस त्योहार की शुरुआत लाखों भक्तों द्वारा भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचकर हुई।
पुरी रथ यात्रा के दौरान, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को ले जाने वाले रथों को पुरी जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक खींचा जाता है, यहां देवता अपनी मौसी से मिलने जाते हैं।

रथयात्रा के अवसर पर अलग अलग दिन विभिन्न रिवाजों और ख़ास परम्पराओं को पूरा किया जाता है। हेरा पंचमी जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान आयोजित एक ऐसा ही अनोखा अनुष्ठान है। यह गुंडिचा मंदिर में मनाया जाता है। जानते हैं रथ यात्रा से जुड़े अनोखे उत्सव हेरा पंचमी की तिथि और इसके महत्व के बारे में।
हेरा पंचमी 2023 तिथि (hera panchami 2023 date)
इस वर्ष हेरा पंचमी 24 जून को पड़ रही है। हेरा या होरा का अर्थ है 'देखना या निहारना' और पंचमी का अर्थ है 'पांचवां दिन' - हेरा पंचमी के दिन देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए गुंडिचा मंदिर की यात्रा करती हैं। पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के पांच दिन बाद देवी लक्ष्मी की यात्रा होती है। हेरा पंचमी दिव्य जोड़े - विष्णु और लक्ष्मी का एक निजी रिवाज़ होता है।
क्या है हेरा पंचमी से जुड़ी मान्यता
लोकप्रिय मान्यता यह है कि भगवान जगन्नाथ ने अपनी पत्नी देवी लक्ष्मी से वादा किया था कि वह अगले दिन वापस आएंगे। लेकिन भगवान जगन्नाथ अगले दिन वापस नहीं लौटते। देवी लक्ष्मी प्रतीक्षा करती रहती हैं और अंत में पांचवें दिन वह पालकी पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर जाती हैं और गुंडिचा मंदिर के बाहर भगवान जगन्नाथ के रथ को देखती हैं।

कैसे मनाई जाती है हेरा पंचमी?
हेरा पंचमी गुंडिचा मंदिर के परिसर में मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ की धर्मपत्नी माता लक्ष्मी जगन्नाथ को देखने उनकी मौसी के स्थान गुंडिचा मंदिर जाती हैं। महालक्ष्मी को मंदिर तक पालकी में लेकर जाया जाता है, जहां पुजारी उन्हें गर्भगृह में लेकर जाते हैं और भगवान जगन्नाथ से मिलवाते हैं। पुजारी माता की तरफ से जगन्नाथ जी की आरती करते हैं। महालक्ष्मी फिर जगन्नाथ जी से घर वापिस आने का अनुरोध करती हैं, बदले में वे सनमाति माला लक्ष्मी जी को वादे के तौर पर देते हैं। बाहर निकलने पर मां लक्ष्मी की भी पूजा होती है और उन्हें दही अर्पित किया जाता है।
जब क्रोध में मां लक्ष्मी ने तोड़ दिया था जगन्नाथ जी का रथ
शाम में जब मां लक्ष्मी वापस जगन्नाथ मंदिर के लिए निकलती हैं लेकिन भगवान् को वहां नहीं पाती तब वे क्रोधित हो जाती हैं और एक सेवक को जगन्नाथ जी के रथ को तोड़ने के लिए भेजती हैं। एक पेड़ के पीछे छिपकर वे जगन्नाथ जी का रथ तोड़ने की क्रिया देखती हैं। कुछ समय बाद हेरा गौरी साहा नाम के रास्ते से माता वापिस मुख्य जगन्नाथ मंदिर पहुंचती हैं।
इस दिन मान्यता के अनुसार ही भगवान जगन्नाथ के रथ के थोड़े हिस्से को तोड़ा जाता है और पूरी प्रक्रिया और अनुष्ठान का आनंद लाखों लोग उठाते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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