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Jagannath Rath Yatra Full Schedule: शुरू हुई रथ यात्रा, यहां देखें किस दिन होगी कौन सी रस्म
भगवान जगन्नाथ की विशाल रथ यात्रा यूं ही नहीं देश और विदेशों में मशहूर है। यह भगवान के प्रति लोगों की आस्था का महापर्व है।
इस उत्सव का आयोजन बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है। उड़ीसा के पुरी में आयोजित होने वाले इस यात्रा में लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। वो भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के नगर भ्रमण यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक रहते हैं।

कई महीनों पहले ही पुरी जगन्नाथ यात्रा की तैयारी शुरू हो जाती है। इस बीच कई तरह की रस्में भी सम्पन्न होती हैं जिनका अपना विशेष महत्व है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा कब से शुरू हो रही है और कौन सी रीति कब निभाई जाएगी, साथ ही जानते हैं उनका महत्व।
रथ यात्रा की सभी महत्वपूर्ण तिथि
देवस्नान पूर्णिमा - स्नान यात्रा : 4 जून 2023
नेत्र उत्सव : 19 जून 2023
श्री गुंडीचा रथ यात्रा : 20 जून 2023
हेरा पंचमी : 24 जून 2023
बहुदा यात्रा : 28 जून 2023
सुना बेश : 29 जून 2023
अधर पना: 30 जून 2023
निलाद्री बिजे : 1 जुलाई 2023
देवस्नान पूर्णिमा महत्व
देव स्नान पूर्णिमा को स्नान यात्रा या सहस्त्रधारा स्नान के रूप में जाना जाता है। रथ यात्रा की शुरुआत से पहले यह ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र को इस दिन गर्भगृह से स्नान मंडप तक लाया जाता है और कुल 108 घड़ों का उपयोग कर सुगन्धित जल से स्नान कराया जाता है।
इसके बाद उन्हें 'सादा बेश' पहनाया जाता है और फिर दोपहर में 'हाथी बेश' में तैयार किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है क्योंकि बच्चों की भांति भगवान भी अधिक स्नान करने से बीमार पड़ जाते हैं और अगले 15 दिन तक उनका उपचार चलता है।
नेत्र उत्सव
अनसर यानी भगवान जगन्नाथ के स्नान के अस्वस्थ होने की अवधि के पूरी होने के बाद नेत्र उत्सव मनाया जाता है। इस दिन चिकित्सक भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलराम को चेक करते हैं और उसके बाद वो अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। मन्दिर के सेवक आँखों में काजल, चंदन, सिंदूर का तिलक लगाकर तैयार करते हैं।
श्री गुंडीचा रथ यात्रा
हर साल आषाढ़ महीने की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलती है। इसी दिन यात्रा के निकलने से पहले पुरी के गजपति रजा सोने के झाडू से रास्ता साफ़ करते हैं। इसके बाद तीन विशाल रथों में विराजकर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र अपने मौसी के घर गुंडीचा मन्दिर के लिए प्रस्थान करते हैं। वहां तीनों भाई बहन नौ दिन तक विश्राम करते हैं और उनके लिए सौ प्रकार के पकवान भोग लके लिए रखे जाते हैं जिनमे से 'पोड़ो पीठा' मुख्य है।

हेरा पंचमी
हेरा पंचमी एक बहुत मुख्य अनुष्ठान है जो जगन्नाथ धाम पुरी में रथ यात्रा की प्रक्रिया के दौरान किया जाता है। यह रथयात्रा के पांचवे दिन होता है। यह माता महालक्ष्मी से जुड़ा रिवाज होता है। हेरा पंचमी का उत्सव गुण्डिचा मंदिर में किया जाता है। इस दिन जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ की पत्नी माता लक्ष्मी, सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में गुंडिचा मंदिर में पहुंचती हैं और उन्हें मौसी के घर में मौजूद भगवान जगन्नाथ से मिलवाया जाता हैं। सुवर्ण महालक्ष्मी अपने वामी जगन्नाथ जी से पुरी में अपने धाम वापस चलने का निवेदन करती हैं।
बहुदा यात्रा
मौसी के घर में समय बिताने के बाद जब तीनों भाई बहन अपने मुख्य धाम की तरफ लौटते हैं तो यूज़ बहुदा यात्रा कहा जाता है। जब वो अपने धाम पहुँचते हैं तो महालक्ष्मी उनसे नाराज हो जाती हैं और उंनसे कहती हैं कि आप यात्रा के लिए अपने भाई बहनों को ले गए और मुझे भूल गए। वह गुस्से में उनके रथ को नुकसान भी पहुंचा देती हैं। वह रुष्ट होकर अपने कमरे में चली जाती हैं। तब भगवान जगन्नाथ रसगुल्ले लेकर उन्हें मनाने के लिए जाते हैं।
सुना बेश
सुना बेश देवशयनी एकादशी के दिन की जाने वाली परंपरा है। इसमें तीनों भाई बहनों को सोने के वस्त्र पहनाये जाते हैं।
अधर पना
सुना बेश के अगले दिन अधर पना तैयार किया जाता है। यह मीठा पेय तीन विशाल मटकों में रखकर तीनों रथों पर चढ़ाया जाता है। यह अधर पना सभी भक्तों को प्रसाद के रूप में मिल सके इसलिए बड़ी हांडियों में छेद कर दिया जाता है। बहते हुए अधर पना को पाने के लिए सभी श्रद्धालु लालायित रहते हैं।
निलाद्री बीजे
नीलाद्री बीजे भगवान के विशाल रथ यात्रा के समापन का प्रतीक होता है। भगवान जगन्नाथ अपने गर्भगृह में वापस लौट जाते हैं और अपनी प्यारी पत्नी के साथ समय बिताते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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