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Jagannath Rath Yatra Gold Broom: रथ निकलने से पहले सोने के झाड़ू किया जाता है रास्ता साफ़
जैसे जैसे जगन्नाथ रथ यात्रा का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे तैयारियां जोर पकड़ती जा रही हैं। उड़ीसा के पुरी में निकलने वाली रथ यात्रा के लिए भक्तों के बीच गजब का उत्साह देखने को मिलता है।
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है।

इस साल यह विश्व प्रसिद्ध यात्रा 20 जून को निकलने वाली है और इसका समापन आषाढ़ माह की एकादशी को होगा। इस यात्रा की भव्यता का अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि इस आयोजन के लिए तैयारी कई महीनों पहले ही शुरू कर दी जाती है।
क्यों किया जाता है रथ यात्रा का आयोजन?
रथ यात्रा के पीछे एक बहुत प्यारी सी मान्यता है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवान जगन्नाथ से उनकी बहन सुभद्रा ने नगर घूमने की इच्छा जाहिर की। बहन के इस मनोरथ को पूरा करने के लिए भगवान जगन्नाथ और बलराम दोनों भाई लग गए। बहुत सुंदर इंतजाम के साथ तीनों भाई बहन नगर भ्रमण के लिए निकले। वही परंपरा आज भी कायम है। सभी भक्त मिलकर तीनों भाई बहनों के लिए भव्य यात्रा का आयोजन करते हैं ताकि उन्हें किसी तरह का कष्ट न हो।

रथ यात्रा निकलने से पहले सोने के झाडू से साफ किया जाता है रास्ता
रथ यात्रा की तैयारी से लेकर इसके समापन तक कई तरह के नियम और रीतिरिवाज का पालन किया जाता है। इन्हीं में से एक रिवायत है सफाई के लिए सोने की झाड़ू के इस्तेमाल की। भव्य रथों के तैयार होने के बाद इसकी पूजा के लिए पुरी के गजपति राजा की पालकी आती है। यह पूजा अनुष्ठान 'छर पहनरा' कहलाती है।
इस रस्म में शाही परिवार के वंशज सोने की झाडू से रथ के मार्ग को साफ़ करते हैं। इसके साथ ही वह चरों तरफ चन्दन का जल छिड़कते हैं। यह रथ यात्रा की बहुत ही प्रचलित प्रथा है और यह दर्शाता है कि भगवान जगन्नाथ के सामने हर कोई समान है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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