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Jagannath Temple Mystery: जानिये जगन्नाथ मंदिर के अन्दर स्थित गरुड़ स्तम्भ का रहस्य
उड़ीसा के पुरी जगन्नाथ में भव्य और विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के बारे में सभी जानते हैं। भगवान् श्री कृष्णा के रूप जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की काष्ठ की बनी सुन्दर मूर्तियों से जुडी रोचक कथाएं काफी लोकप्रिय हैं।
यहां तक की जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला से जुड़ी कई रहस्यमयी बातें भी हैं जो आज भी कौतुहल का विषय है। लेकिन आज हम जानेंगे एक और रोचक बात।
जगन्नाथ मंदिर के अन्दर स्थित गरुड़ स्तंभ का क्या है महत्व? इस गरुड़ स्तंभ की रोज पूजा की जाती है और साथ ही ये बात प्रचलित है कि गरुड़ स्तम्भ के पीछे से अगर जगन्नाथ के दर्शन किये जाएँ तो इसका फल ज्यादा मिलता है. तो आइये जानते हैं इस गरुड़ स्तम्भ से जुडी रोचक बातें।

भगवान् विष्णु का वाहन है गरुड़। जगन्नाथ भगवान् विष्णु और कृष्ण के ही एक रूप हैं। इसलिए परंपरा के अनुसार देव के वाहन को पूजा स्थल पर उचित स्थान जरुर दिया जाता है। जैसे शिव मंदिर में नंदी को स्थान दिया जाता है। इसी परंपरा के अनुसार जगन्नाथ मंदिर में गरुड़ स्तम्भ का निर्माण किया गया। शालिग्राम पत्थर से बने इस गरुड़ स्तम्भ को ऐसे स्थापित किया गया है जहां से गरुड़ को जगन्नाथ के पाँव के दर्शन हो।
11 फीट बड़े इस गरुड़ स्तम्भ के ऊपर पक्षियों के राजा गरुड़ की मूर्ति है जिसमें दोनों हाथ प्रभु की आराधना में जुड़े हुए हैं। गरुड़ पिलर देखने में लगता है की कोई पत्थर की सामान्य रचना है लेकिन ऐसा नहीं है। ये किसी प्राचीन वृक्ष का प्रारूप है जिसके ऊपर गरुड़ विराजमान है। चूँकि गरुड़ पक्षियों का राजा है और सारे पक्षी गरुड़ का सम्मान करते हैं इसलिए मंदिर में गरुड़ स्तम्भ होने की वजह से चिड़िया जगन्नाथ मंदिर के ऊपर नहीं उडती है।
किसकी उंगलियों के हैं निशान
श्री कृष्ण के अनन्य भक्त चैतन्य महाप्रभु एक बार जगन्नाथ के दर्शन के लिए मंदिर गए। भगवान् के दर्शन पाते ही भाव विभोर होकर वो बेसुध हो गए। मंदिर में उपस्थित लोगो ने उन्हें उठाकर मंदिर से बाहर कर दिया। चैतन्य महाप्रभु को होश आने पर बहुत दुःख हुआ। उन्होंने सोचा मंदिर के अन्दर नहीं जा पाऊंगा तो गरुड़ स्तम्भ के पास से ही दर्शन कर लेता हूं। वो पिलर के पास से दर्शन करने लगे और इतने भाव विभोर हो उठे की उनके आंखों से आंसू निकलने लगे।

गरुड़ेर सन्निधाने, रहि' करे दरशने
से आनन्देर कि कहिब ब'ले ।
गरुड़ - स्तम्भेर तले, आछे एक निम्न खाले
से खाल भरिल अश्रु - जले ॥54॥
गरुड़ स्तम्भ के पास एक नाली है जो चैतन्य महाप्रभु के अश्रु धरा से भर गयी थी। स्तम्भ के पास भोग मंडपम है जिसकी दिवार पर आज भी चैतन्य महाप्रभु के हाथों के निशान है और लोग उसपर अपने हाथ रख कर आह्लादित होते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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