Latest Updates
-
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए मशरूम का सेवन, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Special Marriage Act क्या है? सोनाक्षी-जहीर इकबाल समेत इन बॉलीवुड कपल्स ने बिना धर्म बदले की शादी -
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह -
Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? जानें तिथि, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और महत्व -
कभी 75 रुपये में साफ करते थे गाड़ियां, आज कहलाते हैं दिल्ली के खान सर; पढ़ें मनोज गर्ग की सक्सेस स्टोरी -
Sawan 2026: सावन में दाढ़ी और बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें ज्योतिष और धार्मिक नियम -
कौन थीं अनन्या राज? 27 साल की उम्र में हुई मौत, एक महीने बाद सामने आई निधन की खबर
Kabir Das Jayanti 2024: बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय... जरूर पढ़ें कबीरदास के दोहे
Kabir Das Ke Dohe: संत कबीरदास जी ने 15वीं सदी में अपनी साहित्यिक रचनाओं के ज़रिए भक्तिकाल में साहित्य का विकास किया। कबीर दास जी ने मध्यकालीन भारत में अपने दोहों व संदेशों के ज़रिये आम जनमानस तक जागरूकता फैलाने का काम किया। उनकी शिक्षाओं को पालन करने वाले लोगों ने आगे चलकर कबीरपंथ की स्थापना की।
उन्होंने अपनी रचनाओं में सामाजिक रुढियों और धार्मिक आडम्बरों पर करारा प्रहार किया। हर वर्ष ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को संत कबीरदास की जयन्ती मनाई जाती है। इस वर्ष 22 जून को कबीर जयंती मनाई जायेगी। इस ख़ास मौके पर पेश हैं कबीर दास जी द्वारा रचित कुछ दोहे जिन्हें समझने व जीवन में पालन करने मात्र से मानव जीवन की दशा सुधर सकती है -

Kabir Ke Dohe With Hindi Meaning
1
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
(संत कबीर कहते हैं कि जब वो इस दुनिया में बुराई खोजने निकले तब उन्हें कोई बुरा नहीं मिला, लेकिन जब उन्होंने स्वयं के भीतर झाँका तो उन्हें खुद में ही वो सभी बुराइयाँ दिखी। अतः व्यक्ति को दूसरों की बुरे देखने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। )
2.
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥
(इस दोहे का अर्थ है कि मनुष्य को धैर्य बनाए रखना चाहिए। किसी पौधे को माली सौ घड़े पानी डालकर ही क्यों ना सींचे, उसपर फूल तो ऋतु आने पर ही लगेंगे।)
3.
ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोए,
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।
(मनुष्य को हमेशा ऐसी वाणी या बात बोलनी जिससे न केवल दूसरों को बल्कि खुद को भी अच्छा महसूस हो।)
Kabir Das Ke Dohe - Kabir Ke Dohe in Hindi
4.
मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारम्बार।
तरवर से पत्ता टूट गिरे, बहुरि न लागे डारि ।।
(मनुष्य जीवन बेहद दुर्लभ से मिलता है। इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए। जैसे वृक्ष से झाड़ा पत्ता वापस डाली पर नहीं लग सकता वैसे ही एक बार बर्बाद हुआ जीवन वापिस नहीं मिल सकता।)
5.
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

(कई विद्वान ढेर सारी किताबें पढ़कर भी ज्ञानी का चरित्र नहीं हासिल कर पाते। कबीर कहते हैं कि यदि व्यक्ति प्रेम का ढाई अक्षर यानि प्रेम के बारे में समझ जाए तो उससे बड़ा ज्ञानी और कोई नहीं।)
6.
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय॥
(अपने दुःख में इश्वर को सभी याद करते है, परन्तु सुख की प्राप्ति में भगवान को कोई नहीं याद करता। यदि इश्वर को सुख के समय भी याद किया जाता रहे तो उन्हें दुःख मिलेगा ही नहीं।
7.
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
(कल करने वाले कार्यों को आज ही करें और आज करने वाले कार्यों को अभी। कब जीवन खत्म हो जाए और ज़रूरी कार्य रह जाएँ यह किसी को नहीं मालूम होता। इसलिए अपने कार्यों को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहिए।)
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications