Latest Updates
-
Kumaoni Kheera Raita: गर्मी के मौसम में वरदान है उत्तराखंड का ये खीरे का रायता, 10 मिनट में ऐसे करें तैयार -
Surya Grahan 2026: किस अमावस्या को लगेगा दूसरा सूर्य ग्रहण? क्या भारत में दिन में छा जाएगा अंधेरा? -
Jamun Side Effects: इन 5 लोगों को नहीं खाने चाहिए जामुन, फायदे की जगह पहुंचा सकता है भारी नुकसान -
Amarnath Yatra 2026: सावधान! ये 5 लोग नहीं कर सकते अमरनाथ यात्रा, कहीं आप भी तो शामिल नहीं? -
26 या 27 अप्रैल, कब है मोहिनी एकादशी? जानें व्रत की सही तारीख और पारण का शुभ समय -
बेसन या सूजी का चीला, जानें वजन घटाने के लिए कौन सा नाश्ता है सबसे बेस्ट? नोट करें रेसिपी -
तपती धूप में निकलने से पहले खा लें प्याज-हरी मिर्च का ये खास सलाद, लू के थपेड़े भी रहेंगे बेअसर -
Somvar Vrat Katha: सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान शिव पूरी करेंगे हर मनोकामना -
Aaj Ka Rashifal, 20 April 2026: मालव्य योग से चमकेंगे इन राशियों के सितारे, जानें आज का भाग्यफल -
Birthday Wishes for Boss: बॉस के बर्थडे पर भेजें ये खास और सम्मानजनक शुभकामनाएं, बोलें 'हैप्पी बर्थडे'
Kajari Teej 2023: सितंबर के पहले सप्ताह में मनाई जाएगी कजरी तीज, नोट करें डेट व मुहूर्त
Kajari Teej 2023: कजरी तीज भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
इस दिन व्रत के पालन से दाम्पत्य जीवन में आ रही समस्याएं भी दूर होती हैं और जीवन में प्रेम और सुख समृद्धि आती हैं। यह कजरी तीज उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के प्रान्तों में विशेष तौर पर मनाई जाती है।

इस वर्ष कजरी तीज 2 सितम्बर को मनाई जायेगी। इस कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज, सातुढ़ी तीज भी कहा जाता है। जानते हैं कजरी तीज सम्बन्धी तिथि, मुहूर्त, महत्व और अन्य ज़रूरी जानकारियाँ -
कजरी तीज 2023 की तिथि एवं मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 1 सितंबर को रात 11:50 बजे शुरू होगी और समापन 2 सितम्बर को रात 08:49 बजे होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07:57 से सुबह 09:31 बजे तक रहेगा। वहीं रात में शुभ मुहूर्त 09:45 बजे से 11:12 बजे तक रहेगा।
कजरी तीज का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहला कजरी तीज व्रत देवी पार्वती ने रखा था। इस व्रत का पालन करने से वैवाहिक महिलाओं को प्रेम और सुखी दाम्पत्य जीवन की प्राप्ति होती है। इस दिन रात में चन्द्रमा की पूजा की जाती है और हाथ में गेहूं रखकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
पूजन विधि
कजरी तीज के अवसर पर नीमड़ी माता की पूजा करने का विधान है। पूजा से पहले मिट्टी व गोबर से दीवार के कोने में तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है और उसके पास नीम की टहनियों को रोप देते हैं। हाथ से बनाये इस तालाब में कच्चा दूध और जल डालते हैं और किनारे पर एक दीया जलाकर रखते हैं। फिर थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली, अक्षत आदि पूजा के लिए रखे जाते हैं। इसके अलावा लोटे में कच्चा दूध लें और फिर शाम के समय श्रृंगार करने के बाद नीमड़ी माता की पूजा की जाती है।
इस दिन घर के मंदिर को मंडप जैसा सजाकर शिव गौरी की स्थापना करें और मां गौरी को शृंगार की चीज़ें और लाल चुनरी चढ़ाएं। मंत्रोच्चारण के साथ ही सच्चे मन से पूजन करें। शाम में नीमड़ी माता और देवी पार्वती के पूजन के बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











