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Makara Jyothi In Sabarimala 2023 : जानिए मकर ज्योति दर्शन की तारीख, समय, महत्व और तथ्य

मकर संक्रांति के दिन सबरीमाला मंदिर में मकर ज्योति का विशेष महत्व है। ये केरल के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस साल मकर ज्योति 14 जनवरी को दिखाई देगी। इस दिन लोग सूर्य के मकर नक्षत्र में परिवर्तन का जश्न मनाते है। सैकड़ों श्रद्धालु सबरीमाला मंदिर में दर्शन और पूजा-पाठ करने आते हैं और मकर ज्योति के दर्शन करते हैं। तो आइए जानते हैं मकर विलक्कू सबरीमाला मंदिर में मकर ज्योति के दर्शन का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है।
मकर ज्योति दिखने का शुभ समय क्या है?
साल 2023 में सबरीमाला मंदिर में मकर विलक्कू के दर्शन 15 जनवरी को होगा। पंचांग के मुताबिक मकर ज्योति 2023 संक्रांति मुहूर्त 14 जनवरी को रात 8 बजकर 57 मिनट पर दर्शन का समय तय किया गया है। मकर ज्योति शाम 6 बजे से रात 8 बजे के बीच सबरीमाला से 4 किलोमीटर दूर पोन्नम्बलमेडु में पहुंचेगी।
केरल में मकर विलक्कू कैसे मनाया जाता है?
मकर विलक्कू भारत के केरल में मकर संक्रांति पर सबरीमाला के मंदिर में आयोजित किया जाता है। इस त्योहार में भगवान अय्यप्पन के पवित्र आभूषण, जुलूस और सबरीमाला के पहाड़ी मंदिर में एक मण्डली शामिल होती है। जिसे भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। मकर विलक्कू 2023 समारोह में पहले ही हजारों भक्त सबरीमाला मंदिर जा चुके हैं। इसके अलावा, स्थानीय अयप्पा मंदिर समुदाय के साथ मिलकर इस दिन को मनाते हैं और मकर ज्योति के दुर्लभ दर्शन करते हैं।
मकर संक्रांति के दिन पोन्नंबलामेडु में क्षेत्र की जनजाति दीपक जलाती है और मकर महीने के पहले दिन सीरियस स्टार के प्रकट होने के जश्न में कई तरह के अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। साउथ के लोगों में मकर विलक्कू और मकर ज्योति दोनों का बहुत महत्व है। इतना ही नहीं मकर ज्योति को लेकर भी क्षेत्रिय लोगों में काफी गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसा माना जाता है कि मकर ज्योति के दर्शन करने से सौभाग्य, अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।
मकर ज्योति से जुड़े तथ्य
हर साल, मकर ज्योति सबरीमाला में मकर विलक्कु नाम से एक दिव्य दीपक जलाकर रोशनी दिखाई जाती है। सबरीमाला मंदिर में सौकड़ों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं, इस दौरान पहाड़ों में प्रकाश की एक रोशनी दिखाई देती है। प्राचीन समय से इस प्रकाश को दिव्य माना जाता था, कुछ श्रद्धालु आज भी इसे दिव्य रोशनी के रूप में ही मानते हैं। लेकिन ये बात साफ है कि ये दीपक उस क्षेत्र में रहने वाली जनजातियों द्वारा पूजा-पाठ करने के बाद जलाया जाता है।
मकर ज्योति का खगोलीय महत्व
यह दिन धनु के नक्षत्र से मकर तक सूर्य के परिवर्तन का प्रतीक होता है। यह खगोलीय क्षेत्र पर उत्तरी दिशा में सूर्य की 6 महीने की यात्रा की शुरुआत है। उत्तर दिशा में सूर्य की इस यात्रा को 'उत्तरायण' कहा जाता है और 14 जुलाई को 'कर्क संक्रांति' कहा जाता है। इस कारण कई स्थान पर इस त्योहार को उत्तरायण के रूप में मनाते हैं।
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