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Mahalaxmi Vrat Katha: महालक्ष्मी व्रत में जरूर पढ़ें ये कथा, मां लक्ष्मी पूरी करेंगी हर मनोकामना
Mahalaxmi Vrat Katha 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ हो जाते हैं और अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलते हैं। इस साल ये व्रत 19 सितंबर 2026 से शुरू होंगे और 3 अक्टूबर को समाप्त होंगे। धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को समर्पित ये व्रत 16 दिन तक चलते हैं। इस दौरान महिलाएं परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना से उपवास करती हैं। मान्यता है कि इन दिनों मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य, समृद्धि, सौंदर्य और भाग्य में बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि इन दिनों पूजा के दौरा महालक्ष्मी व्रत कथा जरूर पढ़नी या सुननी चाहिए। तो आइए, जानते हैं महालक्ष्मी व्रत कथा के बारे में -

महालक्ष्मी व्रत कथा (Mahalaxmi Vrat Katha In Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था और रोज उनकी पूजा करता था। एक दिन उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और मनचाही इच्छा मांगने को कहा। ब्राह्मण ने भगवान से कहा कि उसके घर में हमेशा मां लक्ष्मी का वास रहे और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे।
ब्राह्मण की इच्छा सुनकर भगवान विष्णु ने उसे मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर के सामने रोज एक स्त्री आती है और वहां उपले थापती है। वह कोई साधारण स्त्री नहीं, बल्कि स्वयं मां लक्ष्मी हैं। भगवान विष्णु ने ब्राह्मण से कहा कि वह उस स्त्री को अपने घर आने का निमंत्रण दे। उनके घर आने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि का वास होगा। इतना कहकर भगवान विष्णु अपने धाम लौट गए।
अगले दिन ब्राह्मण सुबह करीब चार बजे उठकर मंदिर के सामने जाकर बैठ गया। कुछ समय बाद जब वह स्त्री वहां आई, तो ब्राह्मण ने उसे अपने घर आने का निमंत्रण दिया। मां लक्ष्मी समझ गईं कि ब्राह्मण को यह बात भगवान विष्णु ने बताई है।
इसके बाद मां लक्ष्मी ने ब्राह्मण को महालक्ष्मी के 16 व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर व्रत के बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण करना चाहिए। मां लक्ष्मी ने बताया कि इस विधि से व्रत करने पर उसकी मनोकामना पूरी होगी।
ब्राह्मण ने मां लक्ष्मी के बताए अनुसार पूरे विधि-विधान से 16 व्रत किए। 16वें व्रत के दिन उसने उत्तर दिशा की ओर मुंह करके मां लक्ष्मी को पुकारा। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उसे दर्शन दिए और उसकी मनोकामना पूरी कर दी। इसके बाद ब्राह्मण के घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य का वास हो गया।



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