Latest Updates
-
Rang Panchami 2026: रंग पंचमी पर कर लिए ये अचूक उपाय तो चमक जाएगी किस्मत, वैवाहिक जीवन रहेगा खुशहाल -
8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और इस साल की थीम -
Rang Panchami 2026: कब है रंग पंचमी? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व -
पेट के कैंसर के शुरुआती स्टेज में दिखाई देते हैं ये 5 लक्षण, ज्यादातर लोग साधारण समझकर करते हैं इग्नोर -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर होगी हर परेशानी -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: 6 या 7 मार्च, कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व औ -
वरमाला डालते ही अर्जुन ने सानिया चंडोक को लगाया गले, सचिन तेंदुलकर का ऐसा था रिएक्शन, वीडियो वायरल -
बिग बॉस 17 फेम यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने की सुसाइड की कोशिश, इंटरकास्ट शादी को लेकर परिवार पर लगाए गंभीर आरोप -
प्रेग्नेंसी में कटहल खाना चाहिए या नहीं? डाइट में शामिल करने से पहले जान लें इसके फायदे-नुकसान -
होली पर पकवान खाकर पेट में जमा हो गई है गंदगी, तो बॉडी डिटॉक्स के लिए इन चीजों का करें सेवन
Hair Cut on Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या के दिन बाल-नाख़ून काटना शुभ या अशुभ?
Hair Cut on Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक विशेष दिन है, जो माघ मास की अमावस्या को आता है। इस दिन स्नान, ध्यान, मौन व्रत और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
साथ ही, कुछ विशेष परंपराएं और नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है, जिनमें बाल और नाखून न काटने की परंपरा भी शामिल है। इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तर्क जुड़े हुए हैं।

धार्मिक कारण
मौनी अमावस्या को पवित्रता और आत्म-शुद्धि का दिन माना गया है। इस दिन मौन व्रत और ध्यान करके आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास किया जाता है। बाल और नाखून काटना शरीर से जुड़े अस्वच्छता के प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन ऐसी गतिविधियां करने से नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो सकती है और शुभ कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
आध्यात्मिक कारण
मौनी अमावस्या को देवताओं और पितरों को समर्पित दिन माना गया है। इस दिन किए गए कर्म, जैसे दान, तप और उपासना, कई गुना फलदायी होते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, बाल और नाखून काटने से शरीर की ऊर्जा का क्षय होता है, जो साधना और ध्यान में बाधा डाल सकता है। इसे अशुभ और अपवित्र माना गया है, क्योंकि इस दिन आत्मिक ऊर्जा को बढ़ाने पर बल दिया जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
प्राचीन समय में, बाल और नाखून काटने के लिए औजार अत्यधिक तीव्र और साफ नहीं होते थे। अमावस्या के दिन चंद्रमा की स्थिति कमजोर होती है, जिससे शरीर और मन पर प्रभाव पड़ता है। इस दिन शरीर को अधिक विश्राम और आत्मिक संतुलन की आवश्यकता होती है। बाल और नाखून काटने जैसे कार्य इस संतुलन को बाधित कर सकते हैं।
सामाजिक परंपरा
समाज में मौनी अमावस्या के दिन बाल और नाखून काटने को अशुभ और पितृ दोष उत्पन्न करने वाला माना गया है। यह परंपरा इस विश्वास को बल देती है कि इस दिन जितना संभव हो, ध्यान, पूजा और पुण्य कार्यों में समय बिताया जाए।
मौनी अमावस्या पर बाल और नाखून न काटने की परंपरा न केवल धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है, बल्कि इसमें वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू भी शामिल हैं। यह परंपरा व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि का महत्व समझाती है और इस पवित्र दिन पर शुभ कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











