Latest Updates
-
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग -
Shardiya Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
National Boss Day 2026 Wishes: कभी गाइड करते...बॉस डे पर अपने बॉस का दिल से कहें शुक्रिया, भेजें ये खास संदेश -
क्रिएटिनिन क्या होता है? जानें स्वस्थ किडनी के लिए क्रिएटिनिन का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए -
Durga Puja Pandals in Delhi NCR: ये हैं दिल्ली-एनसीआर के टॉप 10 दुर्गा पूजा पंडाल, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन -
बारिश में बाल झड़ना कैसे रोकें: कारण, देखभाल और जरूरी पोषक तत्व -
Ashtami Navami 2026 Date: अष्टमी और नवमी कब है? जानें सही तिथि, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व
Mothers Day: माता सीता हैं सिंगल मदर की आदर्श उदाहरण, हर मां को सीखने चाहिए उनसे ये गुण
आजकल सिंगल मदर पैरेंटिंग के मुद्दे पर खूब चर्चा होती है। सिंगल मदर को बहुत बोल्ड और आधुनिकता के साथ साथ आत्मनिर्भर भी माना जाता है और उसके संघर्षों को सलाम किया जाता है। लेकिन क्या सिंगल मदर पैरेंटिंग आधुनिक कांसेप्ट है? इसका जवाब है नहीं।
पौराणिक कथाओं में कई ऐसे चरित्र हैं जिन्होंने सिंगल मदर की मिसाल पेश की। उदहारण के तौर पर रामायण को ही ले लीजिये। रामायण की माता सीता से बढ़िया उदाहरण नहीं मिलेगा।

विवाहित माता सीता अपने पति का घर छोड़ गयी और अकेले अपने दो पुत्रो का पालन पोषण भी किया। सिंगल मदर की मिसाल पेश करने वाली माता सीता के बारे आइये जानते हैं कि किन कारणों से उन्हें एक उत्तम सिंगल मदर कहा जा सकता है।
गर्भावस्था में महल छोड़ दिया
जब माता सीता के चरित्र पर लांछन लगाने का कुत्सित प्रयास किया गया और पति राम मर्यादा में बंधे होने की वजह से बेबस नज़र आ रहे थे तो ऐसे में अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने की जिम्मेदार इन्होने स्वयं उठा ली। जिस घर में चरित्र पर उंगली उठायी जाए उस घर में रहने से इंकार कर दिया और सबसे आश्चर्य की बात ये कि उस समय माता सीता गर्भवती थी। गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर घर-बार छोड़ कर, महल की आरामदायक ज़िन्दगी को छोड़कर अनिश्चित भविष्य की ओर चल देना ये कोई मामूली बात नहीं। इसके लिए साहस चाहिए। सीता माता ने ये किया इसका मतलब वो उस समय भी काफी बोल्ड और साहसी थी।

सुरक्षा, भोजन और घर का प्रबंध
एक सिंगल मदर के लिए सबसे ज्यादा जरुरी चीजें होती हैं सुरक्षा, भोजन और शरण। माता सीता ने किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। वो सीधे महर्षि वाल्मीकि के पास पहुंच गयीं। उनके आश्रम में पहुंच कर इन्होंने अपने और होने वाले बच्चे के लिए घर, भोजन और सुरक्षा का इंतजाम कर लिया। इससे महर्षि वाल्मीकि को भी एक पुत्री मिल गयी और माता सीता को पिता जैसा महर्षि। ये माहौल सिंगल मदर के लिए काफी बेहतर था क्योंकि यहां इनके चरित्र पर कोई उंगली नहीं उठा पाता और माता सीता आत्मनिर्भर होकर अपने शिशुओं का पालन पोषण कर सकती थीं।
बच्चों की परवरिश और शिक्षा दीक्षा
माता सीता ने सिंगल मदर होते हुए भी ना सिर्फ सुरक्षित तरीके से दो पुत्रों को जन्म दिया बल्कि इन पुत्रों का बहुत ही अच्छे तरीके से पालन पोषण भी किया। पालन पोषण के अंतर्गत सिर्फ खिलाना पिलाना और सुरक्षित रखना ही नहीं होता अपितु सर्वांगीण विकास कराना भी होता है। ये तो सर्वविदित है कि लव और कुश शस्त्र के साथ साथ शास्त्र और गीत संगीत की शिक्षा में भी निपुण हुए। इस तरह माता सीता ने सिंगल मदर के तौर पर एक बेहतरीन आदर्श पेश किया है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
