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Mothers Day: जब मां कैकेयी की इस इच्छा को पूरा करने के लिए राम को लेना पड़ा कृष्ण अवतार
विष्णु के अवतार कृष्ण के जन्म की कहानी कौन नहीं जानता? कृष्ण के जन्म की लोकप्रिय कथा और उनके विभिन्न लीलाओं को कला के कई माध्यमों से जन जन तक पहुंचाया जाता रहा है।
लेकिन क्या आपको मालूम है की असल में कृष्ण अवतार लेने के पीछे मां की ममता का योगदान भी रहा है। जी हाँ, माँ की ममता चीज ही ऐसी है जिसे भगवान् भी पाने को तरसते हैं। और इसी कारण विष्णु ने कृष्ण अवतार भी लिया। आइये आपको बताते हैं कृष्ण के अवतार के पीछे किस माँ की ममता का योगदान रहा और क्या है इसके साथ जुड़ी कथा।

दरअसल रामायण में राजा दशरथ ने कैकेयी को वादा दिया था कि वो जब चाहे दो वरदान मांग सकती है। जब राम सहित चारों भाई बड़े हो गए और राम के राज्याभिषेक का समय आया तो कैकेयी ने राजा दशरथ से वरदान लिया कि राम को वनवास भेज दिया जाए। अपने वचन से बंधे दशरथ राम को नहीं रोक पाए और मर्यादा पुरुषोत्तम राम पिता का वचन खाली ना जाए, इसके लिए वनवास चले गए।
वनवास के दौरान रावण का वध करने के पश्चात जब राम वापस अयोध्या लौटे तो कैकयी पश्चाताप के आंशु रो रही थी. सर्वविदित है की राम को सबसे ज्यादा कैकेयी ही स्नेह देती थी. लेकिन राम को वनवास भेज कर कैकेयी बहुत दुखी रहने लगी थी। वनवास से लौटे राम को देख कैकेयी इतनी रोई की राम भी दुखी हो उठे। फिर कैकेयी ने राम से कहा कि हे पुत्र अगले जन्म में तुम मेरे गर्भ से जन्म लेना।
राम ने उनकी बात मान ली और वचन दिया कि अगला जन्म मैं आपके गर्भ से ही लूंगा। इधर कौशल्या माता भी दुखी हो गयी। फिर राम ने कौशल्या माता को वचन दिया की भले ही मैं माँ कैकेयी के गर्भ से जन्म लूं लेकिन कहलाऊंगा तो आपका पुत्र ही। इस तरह से राम ने माता कौशल्या को भी एक वचन दे दिया।

द्वापर युग में कैकेयी बनी देवकी और कौशल्या बनी यशोदा। कंस के कालकोठी में देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया। कृष्ण के पिता वासुदेव ने बाल कृष्ण को कंस से बचाने के लिए आधी रात में यमुना पार किया और अपने मित्र नन्द के यहां पहुंच गए। यहां नन्द की पत्नी यशोदा ने कृष्ण को स्वीकार किया और अपने पुत्र जैसा स्नेह देकर पाला पोसा। भले ही देवकी रूपी कैकेयी ने कृष्ण को जन्म दिया लेकिन कृष्ण को आज भी यशोदा नंदन ही कहा जाता है। जन्म देने वाली से बड़ी पालने वाली मां होती है ये बात कृष्ण ने अपनी लीला से दुनिया को बता दिया और साथ ही अपनी दोनों माओं को दिया वचन भी निभा दिया।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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