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Muharram 2026: मुहर्रम कब है? 16 या 17 जून, जानें भारत में कब दिखेगा नया चांद और क्या है इसका महत्व
Muharram 2026 Date: इस्लामिक नव वर्ष (हिजरी सन 1448) का आगाज होने जा रहा है, और इसके साथ ही आ रहा है मुहर्रम का मुकद्दस महीना। इस्लाम धर्म में मुहर्रम को केवल एक महीना नहीं, बल्कि त्याग, इबादत और हक की खातिर दी गई महान कुर्बानी का प्रतीक माना जाता है। क्योंकि पूरा इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है, इसलिए मुहर्रम कब से शुरू होगा, इसकी सटीक तारीख को लेकर लोगों में हमेशा उत्सुकता बनी रहती है। क्या भारत में मुहर्रम की शुरुआत 16 जून को होगी या 17 जून को? आइए विस्तार से समझते हैं कि चांद दिखने के बाद कैसे तय होती है नए महीने की तारीख और क्या है इस साल आशूरा की संभावित डेट।

चांद (हिलाल) के दिखने पर कैसे तय होती है मुहर्रम की शुरुआत?
इस्लाम धर्म से जुड़े सभी प्रमुख पर्व और महीने लूनर कैलेंडर यानी चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होते हैं। जब वर्तमान महीने (जिलहिज्जा) की 29वीं तारीख को सूरज ढलने के बाद आसमान में नया अर्धचंद्र (हिलाल) दिखाई देता है, तो उसी रात से नए महीने की शुरुआत मान ली जाती है। यदि मौसम खराब होने या किसी अन्य कारण से 29वीं तारीख को चांद नजर नहीं आता, तो वर्तमान महीना 30 दिनों का पूरा किया जाता है और उसके अगले दिन से नए महीने (मुहर्रम) का आगाज होता है। यही वजह है कि मुहर्रम की शुरुआत पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करती है।
भारत में कब शुरू होगा नया इस्लामिक साल?
चंद्रमा के दिखने की स्थिति स्थान, भौगोलिक दूरी और मौसम के आधार पर दुनिया भर में अलग-अलग हो सकती है। यही कारण है कि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में मुहर्रम का चांद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे एशियाई देशों की तुलना में आमतौर पर एक दिन पहले दिखाई दे जाता है। इसके चलते भारत में मुहर्रम की तारीख खाड़ी देशों से एक दिन पीछे चलती है। अगर देश में 29वें रोज चांद के दीदार हो जाते हैं, तो भारत में 17 जून 2026 से मुहर्रम का पहला दिन शुरू हो सकता है। यदि चांद नजर नहीं आया, ऐसी स्थिति में जिलहिज्जा का महीना 30 दिनों का होगा और मुहर्रम का पहला दिन 18 जून 2026 से प्रारंभ होगा। हालांकि, इसकी अंतिम और आधिकारिक पुष्टि स्थानीय हिलाल कमेटियों (चांद देखने वाली समितियों) की घोषणा के बाद ही होगी।

'यौम-ए-आशूरा' 2026 की संभावित तिथि और इसका इतिहास
मुहर्रम महीने के 10वें दिन को 'यौम-ए-आशूरा' कहा जाता है। यह दिन इस्लामी इतिहास का सबसे भावुक और ऐतिहासिक दिन है, जब पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने कर्बला के मैदान में हक और इंसानियत की खातिर अपनी शहादत दी थी। इस दिन की संभावित तारीखें चांद के अनुसार इस प्रकार होंगी-
यदि चांद दिखने के बाद मुहर्रम की पहली तारीख 16 जून तय होती है, तो आशूरा 25 जून 2026 को मनाया जाएगा। यदि मुहर्रम की शुरुआत 17 जून से होती है, तो 10वां मुहर्रम यानी आशूरा 26 जून 2026 को पड़ने की पूरी संभावना है। इस दिन देश भर में इमाम हुसैन की याद में ताजियों के जुलूस निकाले जाते हैं और लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं।



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