Latest Updates
-
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया
Nag Panchami Ki Katha: इस कथा के बिना अधूरा है नाग पंचमी का व्रत-पूजन, जरूर पढ़ें सर्प देवता की पौराणिक कथा
Nag Panchami Katha: आज यानी 21 अगस्त को नाग पंचमी का शुभ अवसर है। सावन जारी है और महादेव शिव की भक्ति में सभी लोग सराबोर हैं। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है, और दूध से उनका अभिषेक किया जाता है।
नाग भगवान् शिव के प्रिय होते हैं और हमेशा उनके गले में एक नाग लिपटा होता है। इसलिए सावन के माह में नाग देवता की भी पूजा की जाती है। नाग पंचमी के दिन नाग पंचमी की कथा का पाठन और श्रवण करना शुभ माना जाता है। जानते हैं नाग पंचमी की धार्मिक कथा -

नाग पंचमी की कथा
प्राचीन समय में एक सेठ थे, जिनके 7 पुत्र थे। सातों का विवाह हो चुका था। सबसे छोटी बहु बहुत ही सुशील और संवेदनशील व्यवहार की, परन्तु उसका कोई भाई नहीं था।
एक दिन सेठ की सारी बहुएं घर लीपने के लिए मिटटी लेने खुरपी और कुदाल लेकर गई। मिटटी खोदते वक्त अचानक से वहाँ एक सांप निकला, जिसे बड़ी बहु खुरपी से मारने लगी। तभी छोटी बहु ने रोकते हुए कहा कि उसे मत मारों, बेचारा निपराध है। सांप एक कोने में जा छिप बैठा, और छोटी बहु उससे बोली कि यही बैठों में थोड़ी देर में आई। इसके बाद सब मिटटी लेकर घर चली गई। लेकिन घर के कामकाज में लग गई और सांप को किया वादा भूल गई।
उसे अगले दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहां पहुंची और देख की सर्प उसी स्थान पर बैठे हुए हैं। उन्हें देखकर वह बोली- सर्प भैया नमस्कार! सर्प ने उत्तर देते हुए कहा, 'तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी ही डस लेता।' जवाब में वह बोली- 'भैया मुझसे भूल हो गई, मुझे क्षमा कर दो', तब सर्प बोला- 'अच्छा, तू आज से मेरी बहन हुई और मैं तेरा भाई हुआ। तुझे जो मांगना हो, मांग ले।' वह बोली- 'भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ कि तुम मेरे भाई बन गए।'
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि मेरी बहन को भेज दो। इस पर सबने कहा कि इसका तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला कि मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं, बचपन में ही बाहर चला गया था। उसकी बातों पर सबको विश्वास हो गया और घर के लोगों ने छोटी बहु को उसके साथ भेज दिया। उसने मार्ग में बताया कि मैं वहीं सर्प हूं, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूंछ पकड़ लेना। उसने कहे अनुसार ही किया और इस तरह वह उसके घर पहुंच गई। उस जगह के धन-ऐश्वर्य शान शौकत को देखकर वह चकित हो गई।
एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा, 'मैं एक काम से बाहर जा रही हूं, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। उसे यह बात ध्यान न रही और उसने गर्म दूध पिला दिया, जिससे सर्प भाई का मुख जल गया। यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई। परंतु सर्प के समझाने पर शांत हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए। तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा धन, दौलत, सोना, चांदी, जवाहरात, वस्त्र, आभूषण आदि देकर उसके घर पहुंचा दिया।
ससुराल में इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए। सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएं सोने की लाकर दे दीं। यह देखकर बड़ी बहू ने कहा, 'इन्हें झाड़ने के लिए तो झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए।' तब सर्प ने झाड़ू भी सोने की लाकर रख दी।
इतना ही नहीं, सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार भी दिया था। उसकी प्रशंसा तो उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू के पास जो हार है वो यहां आना चाहिए। राजा ने मंत्री को आदेश दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र महल में आएं। मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि महारानीजी छोटी बहू का हार चाहती हैं, वह उससे लेकर मुझे दे दो। सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मंगाकर मंत्री को दे दिया।
छोटी बहू को यह सब बात बहुत बुरी लगी। उसने दुखी होकर अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए। सर्प ने ठीक वैसा ही किया। जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया। यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी।
यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत महल भेजो। सेठजी डर गए और वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर राजा के सामने उपस्थित हुए। राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूंगा। छोटी बहू बोली- राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है। यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- इसे अभी हमारी उपस्थिति में पहनकर दिखाओ। छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का खूबसूरत हार हो गया।
यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं। सेठ की छोटी बहु वह तोहफे और अपने हार लेकर घर लौट आई। उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है। यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी।
तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे खा लूंगा। यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा आदर सत्कार किया। उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications