Latest Updates
-
Fry Pan Method Fish Masala Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा फिश मसाला -
Pahadi Green Superfood Kafuli Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और पौष्टिक स्वाद -
टीम इंडिया की जर्सी पाकर इमोशनल हुए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी, कही ये बड़ी बात, देखें Video -
क्यों मनाते हैं International Olympic Day? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम -
कौन हैं WhatsApp के नए CEO कुणाल शाह? न इंजीनियरिंग, न MBA डिग्री, फिर भी करोड़ों में है नेट वर्थ -
Mahesh Navami 2026: महेश नवमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, इन उपायों को करने से मिलेगी हनुमान जी की विशेष कृपा -
Happy Mahesh Navami 2026 Wishes: महेश जिनका नाम है...महेश नवमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 23 June 2026: मंगलवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी बजरंगबली की कृपा, जानें अपना भाग्य -
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क
Narad Jayanti: जब नारद मुनी के लिए मुसीबत बन गया हनुमान का संगीत, पढ़ें रोचक कथा
देवर्षि नारद जितने रोचक हैं उससे कहीं ज्यादा रोचक है उनसे जुडी कथाएं। देवता हो या दानव, सबको मुसीबत के समय उचित सलाह और सूचना देने वाले नारद मुनी को सभी ने सम्मान दिया किन्तु एक हनुमान ही ऐसे देवता थे जिन्होंने नारद मुनी के साथ ऐसी शरारत की कि नारद मुनी परेशान हो उठे थे।
जैसा की सर्वज्ञात है की बचपन में हनुमान बहुत शरारती थे। सूर्य देव को फल समझ के निगलने वाले हनुमान ने विष्णु के परम भक्त नारद को भी नहीं छोड़ा। नारद के साथ हनुमान की छेड़खानी की कथा काफी रोचक है। आइये नारद जयंती के अवसर पर हम आपको वो कथा बताते हैं:
नारद और शरारती हनुमान जी की कथा
हुआ यूं की एक बार बाल हनुमान अपनी माता अंजना के साथ बगीचे में बैठ कर बातचीत कर रहे थे। हनुमान के पास प्रश्नों की कमी नहीं थी और माता अंजना उत्तर देते देते थक जाती थी। ऐसे ही दोनों का प्रश्नोत्तर चल रहा था। तभी कहीं से वीणा की बहुत सुन्दर ध्वनि हनुमान के कानों पर पड़ी।
बाल हनुमान बहुत उत्सुक हो उठे कि इतना सुन्दर संगीत कहां से आ रहा है और कौन इतना सुन्दर गा रहा है! माता अंजना भी उत्सुक हो उठीं। दोनों उस और चल पड़े जहा से ये संगीत आ रहा था। दोनों ने देखा नारद मुनी अपनी वीणा लिए गाने में लीन थे। दोनों को देख नारद मुनी चुप हो गए।
हनुमान ने नारद मुनी का अभिवादन किया। उसके बाद वो नारद का मार्ग रोक कर खड़े हो गए। नारद ने पूछा कि मेरा रास्ता क्यूँ रोक रहे हो? हनुमान ने कहा कि आपके संगीत से मैं बहुत अभिभूत हूं, मुझे भी संगीत सिखाइए तभी आपको जाने दूंगा।
नारद मुनी बाल हनुमान के हठ को देख हंस पड़े। फिर एक छोटे से टीले के पास बैठ गए और टीले पर अपनी वीणा को रख दिया। अब हनुमान की संगीत की शिक्षा शुरू हुई। जल्द ही हनुमान ने गायन सिख लिया। फिर नारद ने कहा कि अब गाकर सुनाओ। हनुमान ने गाना शुरू किया। हनुमान ने ऐसे राग में गाना शुरू किया कि जिस टीले पर वीणा रखी हुई थी वो पिघलने लगी।

नारद मुनी तो आंख बंदकर हनुमान के गायन का आनंद ले रहे थे सो उन्हें पता भी नहीं चला। टीला पिघलता गया और नारद की वीणा उसमें समाती चली गयी। जब हनुमान का गाना बंद हुआ तो टीला वापस पत्थर में बदल गया।
नारद ने आंखे खोली और देखा की उनकी वीणा पत्थर के अन्दर फंस गयी है। अब नारद को पता चला कि हनुमान ने शरारत की है। बड़ी मुसीबत में फंस गए नारद। फिर उन्होंने हनुमान को कहा कि फिर गाना गाओ ताकि मैं अपनी वीणा ले लूं। अब हनुमान नारद की बात मान ही नहीं रहे थे, वो इधर उधर कूदने लगे।
नारद को मुसीबत में देख माता अंजना आई। उन्होंने नारद से क्षमा मंगाते हुए हनुमान को आदेश दिया कि वो फिर से गाना गाये और मुनी की वीणा वापस करे। हनुमान ने कहा मैं ऐसा तभी करूंगा जब नारद मुनी उनके घर चले और घर के एक एक कोने में अपना पांव रखकर उसे पवित्र करें। ऐसा सुनते ही नारद मुनी काफी प्रसन्न हुए।
उन्होंने हनुमान को ढेर सारा आशीर्वाद दिया और उनके कहे अनुसार किया। फिर जाकर हनुमान ने वापस गाना गाया जिससे नारद को अपनी वीणा वापस मिली। नारद नारायण नारायण कहते हुए अपने लोक चले गए।
बाल हनुमान और नारद की इस कथा से एक शिक्षा भी मिलती है। शिष्य अगर योग्य हो तो गुरु उसके हर हठ को भी मान लेते हैं और भक्त में लगन और सच्ची श्रद्धा हो तो गुरु से मन चाही मुराद पायी जा सकती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications