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नारद पुराण के अनुसार क्या है सर्वोत्तम दान, जिसकी मदद से स्वर्ग में मिलता है स्थान?
नारद मुनि का नाम सुनते ही मन में एक तस्वीर उभर आती है- सर पर बालों को लपेटकर बनाए गए जुड़े के साथ नारायण नारायण कहते एक ऋषि प्रकट होते हैं, जिन्हें तमाम लोको में क्या क्या हो रहा है इसकी पूरी जानकारी होती है और वो जानकारी समय की आवश्यकता के अनुसार सबको बांटते हैं।
उनकी इस जानकारी से देवताओं और असुरों सबके कार्य आगे बढ़ते हैं और निर्णय लेने में मदद मिलती है। अपितु देवता और असुर ये समझते हैं कि नारद उनकी मदद कर रहे हैं किन्तु अंतिम सत्य तो ये है कि नारद सिर्फ और सिर्फ महा विष्णु के कार्यकलापों में आयोजन और नियोजन का कार्य करते हैं।

नारद मुनि के बारे में जो कम ज्ञात तथ्य है वो यह की नारद परम ज्ञानी हैं, संगीत और कला में पारंगत हैं, इनका कोई शत्रु नहीं और कर्मकांड करवाने में इनसे ज्यादा कोई ज्ञानी नहीं है।
नार का मतलब है जल और द का मतलब है दान। नारद मुनी जलदान यानी तर्पण करवाने में अत्यंत निपुण ज्ञानी ब्राह्मण हैं। हो भी क्यूँ नहीं? ये अपने पिछले जन्म में एक गंधर्व थे और हरि भक्ति के प्रभाव से ब्रह्मा के मानस पुत्र के रूप में फिर से जन्म हुआ था। इस कारण इनके पास असीम ज्ञान है, सभी वेदों पुराणों की जानकारी है, श्राद्ध और तर्पण कराने में ये सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण हैं।
इनकी लिखी पुस्तक नारद पुराण से मोक्ष प्राप्त करने लायक ज्ञान मिलता है। कहने का मतलब ये है कि नारद मुनी सिर्फ सूचना का सम्प्रेषण करने वाले एक पत्रकार और देवता ही नहीं, ज्ञान का भण्डार भी हैं।

इनकी लिखी नारद पुराण के अनुसार ये रहे वो बहुत महत्वपूर्ण दान जिनके देने से व्यक्ति को स्वर्ग में स्थान मिलता है। ये दान कभी भी किये जा सकते हैं लेकिन अगर नारद जयंती के दिन किया जाए तो विशेष फल प्राप्त होता है।
अन्न दान
नारद मुनी कहते हैं कि अन्न दान से श्रेष्ठ और कोई दान नहीं है। अन्नदाता प्राणदाता की भांति है और प्राणदाता मतलब साक्षात् ईश्वर है।
दूध का दान करना
अन्न के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण दान है वो है दूध, दही और घी। ख़ासतौर पर गाय के दूध से बने उत्पाद का दान किया जाए तो भगवान् विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं और स्वर्ग में स्थान देते हैं।
शालिग्राम का दान करना
शालिग्राम में विष्णु निवास करते हैं और शिव लिंग में शिव जी निवास करते हैं। शिव को विष्णु प्रिय हैं और विष्णु को शिव। इसलिए जो शालिग्राम और शिवलिंग दान करता है उस पर दोनों की कृपा होती है और उसे स्वर्ग में स्थान मिलता है।

पान का दान
पान भगवान् विष्णु को बहुत प्रिय है। पान का दान करने से विष्णु प्रसन्न होकर सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। साथ ही अगर विष्णु प्रसन्न हो तो लक्ष्मी का प्रसन्न होना स्वाभाविक है इसलिए धन भी प्राप्त होता है।
गुड़ का दान
क्षीरसागर में विष्णु निवास करते हैं और गुड़ इनको बहुत प्रिय है। ईख के रस की तुलना क्षीरसागर से की जाती है इसलिए ईख का रस या ईख के रस से बने गुड का दान किया जाए तो विष्णु प्रसन्न होते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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