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Navratri 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए जरूर पढ़ें ये शक्तिशाली संस्कृत श्लोक
Navratri 1st day Maa Shailputri Sanskrit Shloka Mantra With Meaning: शरद ऋतु की पावन बेला और चैत्र नवरात्रि का मंगलमय प्रारंभ! सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व केवल नौ दिनों का उपवास नहीं, बल्कि अंतरात्मा की शुद्धि और ब्रह्मांड की आदि-शक्ति 'माँ दुर्गा' के नौ दिव्य स्वरूपों के प्रति अटूट श्रद्धा प्रकट करने का महापर्व है। साल 2026 में 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रही इस पावन नवरात्रि के प्रथम दिन हम हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री की वंदना करते हैं।
मां शैलपुत्री, जो वृषभ पर सवार हैं, जिनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल का पुष्प सुशोभित है, वे स्थिरता और संकल्प की अधिष्ठात्री देवी हैं। माना जाता है कि नवरात्रि के पहले दिन यदि सच्चे मन और शुद्ध उच्चारण के साथ माता के प्राचीन संस्कृत श्लोकों का जाप किया जाए, तो साधक की मूलाधार चक्र की ऊर्जा जाग्रत होती है और जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
संस्कृत के इन श्लोकों में ऐसी अदृश्य शक्ति समाहित है, जो वातावरण में सकारात्मक स्पंदन (Vibrations) पैदा करती है। आइए, नवरात्रि के इस प्रथम पुण्य अवसर पर भक्ति के रस में डूबकर माँ शैलपुत्री के उन परम शक्तिशाली श्लोकों और मंत्रों को जानें, जिनके जाप से आपके घर-आंगन में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का वास होगा।

$$वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।
$$$$वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥$$
अर्थ: मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मैं उन माँ शैलपुत्री की वंदना करता हूँ,
जिनके मस्तक पर आधा चंद्रमा सुशोभित है,
जो बैल (वृषभ) पर सवार हैं,
जो त्रिशूल धारण करती हैं और जो अत्यंत यश वाली हैं।
2. माता शैलपुत्री की सरल स्तुति
साधना के दौरान इस श्लोक का जाप माँ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का सबसे सरल तरीका है।
$$या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।$$
$$नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥$$
अर्थ: हे देवी! जो समस्त प्राणियों में माँ शैलपुत्री के रूप में स्थित हैं,
आपको मेरा नमस्कार है, आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
3. माँ शैलपुत्री का बीज मंत्र
यह एक एकाक्षरी मंत्र है जो मूलाधार चक्र को जागृत करने में सहायक माना जाता है।
"ह्रीं शिवायै नम:॥"
अर्थ: भगवान शिव की शक्ति और मंगलकारी रूपा माँ शैलपुत्री को मेरा प्रणाम है।
4. नवदुर्गा मंगलाचरण
यह श्लोक नौ देवियों की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
$$प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।$$
$$तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम॥$$
अर्थ: दुर्गा का पहला स्वरूप 'शैलपुत्री' है, दूसरा 'ब्रह्मचारिणी',
तीसरा 'चन्द्रघंटा' और चौथा 'कूष्माण्डा' है।
इनका स्मरण मात्र ही कल्याणकारी है।
5. आरोग्य और बाधा मुक्ति मंत्र
जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए माँ शैलपुत्री के समक्ष इस श्लोक का पाठ करें।
$$सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्य सुतान्वितः।$$
$$मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥$$
अर्थ: माँ की कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है और
धन, धान्य व संतान से संपन्न होता है। इसमें कोई संशय नहीं है।
6. शक्ति और तेज प्राप्ति श्लोक
देवी के तेज का वंदन करने के लिए इस मंत्र का जाप करें।
$$देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।$$
$$प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥$$
अर्थ: हे शरणागतों के कष्ट दूर करने वाली देवी! आप प्रसन्न हों।
हे संपूर्ण जगत की माता! आप प्रसन्न हों। हे विश्वेश्वरी!
आप विश्व की रक्षा करें, क्योंकि आप ही इस चराचर जगत की स्वामिनी हैं।
7. स्थिरता और शांति के लिए
हिमालय की पुत्री होने के कारण माँ शैलपुत्री अडिगता प्रदान करती हैं।
$$ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥$$
अर्थ: मैं दिव्य माँ शैलपुत्री के चरणों में नमन करता हूँ।
यह सरल मंत्र मानसिक शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
8. सर्व कल्याणकारी मंत्र
माँ शैलपुत्री 'शिव' की अर्धांगिनी हैं, यह मंत्र शिव-शक्ति दोनों का आशीर्वाद दिलाता है।
$$सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।$$
$$शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥$$
अर्थ: हे नारायणी! आप सभी मंगलों में मंगल करने वाली,
कल्याणकारी और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं।
आप ही शरण देने वाली गौरी हैं, आपको मेरा नमन है।
9. भय नाशक श्लोक
अगर मन में किसी प्रकार का भय हो, तो इस श्लोक का उच्चारण माँ शैलपुत्री के ध्यान में करें।
$$सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।$$
$$भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते॥$$
अर्थ: हे सर्वस्वरूपा, सबकी स्वामिनी और सर्वशक्तिमान देवी!
हमें हर प्रकार के भय से बचाएं। हे माँ दुर्गा! आपको मेरा सादर प्रणाम है।
10. शांति और क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में माँ के चरणों में यह श्लोक समर्पित करें।
$$न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो।$$
$$न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः॥$$
अर्थ: हे माँ! मैं न मंत्र जानता हूँ, न यंत्र और न ही मुझे स्तुति करना आता है।
मुझे न आवाहन का पता है न ध्यान का, मैं तो बस आपकी शरण में हूँ।



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