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Navratri 2026 Kalash Sthapana: शुभ फल के लिए कलश में क्या डालें? जानें डॉ. वाई राखी के अचूक उपाय
Navratri 2026 Kalash Sthapana: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च, गुरुवार से हो रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा का आधार 'कलश स्थापना' या 'घटस्थापना' को माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कलश को ब्रह्मांड, त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और स्वयं गणेश जी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि सही विधि से स्थापित कलश घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की उपस्थिति को बनाए रखता है।
अक्सर लोग कलश तो स्थापित करते हैं, लेकिन उसमें डाली जाने वाली सामग्रियों के महत्व से अनजान रहते हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और वास्तु विशेषज्ञ डॉ. वाई राखी के अनुसार, कलश केवल जल का पात्र नहीं है, बल्कि यह आपकी सुख-समृद्धि का चुंबकीय केंद्र है। डॉ. राखी बताती हैं कि यदि कलश के जल में कुछ विशेष 'दिव्य चीजें' डाली जाएं, तो यह न केवल पूजा को पूर्ण बनाता है बल्कि आपके जीवन में ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी दूर करता है।

कलश स्थापना 2026: तिथि और मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर, 19 मार्च, गुरुवार के दिन कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम समय अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो दोपहर 12:05 बजे से लेकर 12:53 बजे तक है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इसी समय के बीच दोपहर 12:29 बजे से 1:59 बजे तक 'लाभ चौघड़िया' भी विद्यमान रहेगा। अतः यदि आप घर में सुख-समृद्धि और शुभ फल की कामना करते हैं, तो डॉ. वाई राखी के अनुसार इसी विशेष समयावधि में घटस्थापना करना अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी सिद्ध होगा।
कलश स्थापना कैसे करें?
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है। डॉ. वाई राखी के अनुसार, इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई घटस्थापना आपके परिवार के लिए आरोग्य और आर्थिक उन्नति के द्वार खोलती है। डॉ. वाई राखी के अनुसार शुभ फल के लिए कलश में जरूर डालें ये 7 चीजें जिससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और मां का आशीर्वाद मिलता है।
1. गंगाजल और शुद्ध जल
कलश की शुरुआत पवित्र गंगाजल से करें। डॉ. राखी के अनुसार, गंगाजल मन की शुद्धि और वातावरण की पवित्रता का प्रतीक है। इसके बाद कलश को कंठ (गले) तक शुद्ध जल से भरें।
2. अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
कलश में मुट्ठी भर अक्षत डालना संपन्नता का संकेत है। अक्षत का अर्थ है 'जिसका क्षय न हो', यानी यह आपके घर में धन और धान्य की निरंतरता को सुनिश्चित करता है।
3. सुपारी (Betel Nut)
शास्त्रों में सुपारी को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है। डॉ. वाई राखी बताती हैं कि कलश में सुपारी डालने से पूजा बिना किसी विघ्न के संपन्न होती है और जीवन के अटके हुए कार्य बनने लगते हैं।
4. सिक्का (Coin)
कलश के भीतर तांबे, पीतल या चांदी का सिक्का डालना लक्ष्मी को आमंत्रित करने का एक अचूक उपाय है। यह आर्थिक मजबूती और व्यापार में लाभ का प्रतीक माना जाता है।
5. हल्दी की गांठ
हल्दी को सौभाग्य, आरोग्यता और पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है। डॉ. राखी के अनुसार, कलश में हल्दी की गांठ डालने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और घर में मांगलिक कार्य होने के योग बनते हैं। इसके साथ ही शुभ फल की प्राप्ति के लिए कलश में 2 लौंग और दो बतासे भी डालें।
6. दूर्वा (Durva Grass)
दूर्वा कभी नहीं सूखती और हमेशा फैलती रहती है। कलश में दूर्वा डालना वंश वृद्धि और परिवार के सदस्यों की लंबी आयु के लिए बहुत फलदायी माना जाता है।
7. आम या अशोक के पत्ते
कलश के मुख पर सजाए जाने वाले पंचपल्लव (5 या 7 पत्ते) सकारात्मक ऊर्जा को घर के भीतर रोककर रखते हैं। डॉ. वाई राखी के अनुसार, ये पत्ते घर के वास्तु दोषों को दूर करने में भी सहायक होते हैं। साथ में इत्र भी डालें और कलश को कुमकुम और हल्दी से सजाएं।
नारियल रखने की सही दिशा
अक्सर लोग नारियल रखने में गलती कर देते हैं। बता दें कि नारियल का मुख हमेशा साधक (पूजा करने वाले) की ओर होना चाहिए। यदि नारियल का मुख आकाश की ओर हो तो वह रोग बढ़ाता है और नीचे की ओर हो तो शत्रु बढ़ते हैं, इसलिए नारियल को कपड़े में लपेटकर इस तरह रखें कि उसकी 'आंखें' आपकी ओर हों।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।
नवरात्रि संपन्न होने के बाद कलश के पवित्र जल को पूरे घर में छिड़कना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। बचा हुआ जल किसी पौधे (तुलसी को छोड़कर) में डाल दें।
यदि आप अभिजीत मुहूर्त (12:05 PM - 12:53 PM) चूक जाते हैं, तो आप लाभ चौघड़िया के समय (दोपहर 12:29 से 1:59 तक) भी स्थापना कर सकते हैं। श्रद्धा भाव मुख्य है।



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