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धार्मिक दृष्टि से जुलाई का महीना बहुत विशेष महत्व रखता है। सावन के साथ साथ अभी अधिकमास भी जारी है। अब सावन माह में आने वाली विशेष एकादशी भी आने वाली है।
हर माह में दो एकादशी आती है और यह तिथि विष्णु अराधना के लिए महत्वपूर्ण होती है। पंचांग के अनुसार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से दोगुना फल की प्राप्ति होती है। जानते हैं इस अति महत्वपूर्ण पद्मिनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में विस्तार से -
पद्मिनी एकादशी तिथि एवं मुहूर्त
श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जुलाई को दोपहर 02:51 बजे से होगी और इसका समापन 29 जुलाई को दोपहर 01:05 बजे होगा। उदया तिथि को मानते हुए पद्मिनी एकादशी 29 जुलाई को मनाई जायेगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07:22 बजे से 09:04 बजे तक होगा। वहीं दिन में शुभ मुहूर्त 12:27 बजे से शाम के 05:33 बजे तक रहेगा।

पद्मिनी एकादशी का महत्व
ऐसी मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी के दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की अराधना से श्रीहरि के चरणों और विष्णु लोक में स्थान मिलता है। इस दिन व्रत का पालन करने से यज्ञ, तप, दान के समान फल की प्राप्ति होती है। अधिकमास के दौरान यह एकादशी तीन सालों में एक बार आती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन विष्णु अराधना और व्रत पालन से संतान प्राप्ति की मनोकामना भी पूरी होती है।
एकादशी व्रत विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सुबह के शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। इसके पश्चात विष्णु पुराण का पाठ करें या सुनें। एकादशी की रात को विष्णु के भजन करते हुए जगे रहें। हर पहर में विष्णु और शिव की पूजा करें और अलग अलग भेंट चढ़ाएं जैसे नारियल, सुपारी, बेल आदि। इसके बाद द्वादशी की सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराएं और ज़रुरतमंदों को दान दक्षिणा दें। इसके बाद विष्णु को ध्यान में रखकर अपने व्रत का पारण करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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