Latest Updates
-
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए मशरूम का सेवन, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Special Marriage Act क्या है? सोनाक्षी-जहीर इकबाल समेत इन बॉलीवुड कपल्स ने बिना धर्म बदले की शादी -
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह -
Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? जानें तिथि, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और महत्व -
कभी 75 रुपये में साफ करते थे गाड़ियां, आज कहलाते हैं दिल्ली के खान सर; पढ़ें मनोज गर्ग की सक्सेस स्टोरी -
Sawan 2026: सावन में दाढ़ी और बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें ज्योतिष और धार्मिक नियम -
कौन थीं अनन्या राज? 27 साल की उम्र में हुई मौत, एक महीने बाद सामने आई निधन की खबर -
Rudrabhishek Vidhi: घर पर शिव जी का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें सरल पूजा विधि, सामग्री, मंत्र और जरूरी नियम -
Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर करें ये 5 सरल उपाय, कालसर्प दोष से मिलेगी राहत
Happy Pongal Tamil New Year 2024: चार तरह के होते हैं पोंगल, मनाया जाता है तमिल नववर्ष का उत्सव
Happy Pongal 2024: हर वर्ष पोंगल का त्यौहार दक्षिण भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। मुख्य रूप से तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में मनाए जाने वाले इस पर्व को अब देश के कई अन्य क्षेत्रों में भी मनाया जाता है।
पोंगल का त्यौहार 4 दिनों तक चलता है पारम्परिक रूप से ये सम्पन्नता को समर्पित त्यौहार है जिसमें समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप तथा खेतिहर मवेशियों की आराधना की जाती है। जानते हैं इस वर्ष पोंगल उत्सव कब से शुरू हो रहा है और इस पर्व का जश्न किस प्रकार होता है -

पोंगल 2024 तिथि
इस साल पोंगल 15 जनवरी से शुरू होगा। यह पर्व 4 दिन तक चलता है, जो 18 जनवरी को खत्म होगा। मान्यता अनुसार पोंगल के दिन से ही तमिल नववर्ष की शुरुआत होगी। पोंगल का पहला दिन देवराज इंद्र को समर्पित होता है, इसे भोगी पोंगल भी कहा जाता है।
भोगी पोंगल
पहले दिन भोगी पोंगल के अवसर पर भगवान इंद्र देव की पूजा की जाती है। इस दिन प्रकृति का शुक्रिया अदा करते हुए इंद्रा देव को धन्यवाद देते हैं। इस दिन लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करते हैं और घर के पुराने-बेकार सामान को आग में डालते हैं।

सूर्य पोंगल
दूसरा दिन सूर्य पोंगल का होता है। यह सूर्य उत्तरायण के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव का आभार प्रकट करते हुए उनकी पूजा की जाती है। सूर्य पोंगल के दिन एक ख़ास तरह की खीर भी बनायी जाती है जिसे पोंगल खीर कहा जाता है।
मट्टू पोंगल
पर्व के तीसरे दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है, इस दिन पशुओं की पूजा कीई जाती है। इस दिन किसान परिवार अपने मवेशियों गाय, बैल आदि को सजाते हैं और उनकी पूजा करते हुए आभार प्रकट करते हैं। इसके साथ कई क्षेत्रों में बैलों की दौड़ का भी आयोजन किया जाता है।
कन्या पोंगल
पोंगल उत्सव का चौथा दिन कन्या पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन घरों को को सुंदर फूलों और पत्तों से सजाया जाता है, इसके साथ ही घरों के आँगन में सुंदर रंगोलियां मनाई जाती है। इस आखिरी दिन गन्ने, चावल, दूध और घी से बना ख़ास पकवान बनाते है।
पोंगल के पर्व उत्सव में लोक पकवान बनाए जाते हैं और लोक गीत गाये जाते हैं।
पोंगल पर्व का महत्व
पोंगल नई फसल और संपन्नता का प्रतीक होता है। यह पर्व मनुष्यों विशेषकर किसान परिवारों द्वारा प्रकृति को धन्यवाद कहने का भी पर्व होता है। इस पर्व से भगवान का भी शुक्रिया अदा किया जाता है जिनके आशीर्वाद से खेतों में फसल लहलाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications