Latest Updates
-
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना
Happy Pongal Tamil New Year 2024: चार तरह के होते हैं पोंगल, मनाया जाता है तमिल नववर्ष का उत्सव
Happy Pongal 2024: हर वर्ष पोंगल का त्यौहार दक्षिण भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। मुख्य रूप से तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में मनाए जाने वाले इस पर्व को अब देश के कई अन्य क्षेत्रों में भी मनाया जाता है।
पोंगल का त्यौहार 4 दिनों तक चलता है पारम्परिक रूप से ये सम्पन्नता को समर्पित त्यौहार है जिसमें समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप तथा खेतिहर मवेशियों की आराधना की जाती है। जानते हैं इस वर्ष पोंगल उत्सव कब से शुरू हो रहा है और इस पर्व का जश्न किस प्रकार होता है -

पोंगल 2024 तिथि
इस साल पोंगल 15 जनवरी से शुरू होगा। यह पर्व 4 दिन तक चलता है, जो 18 जनवरी को खत्म होगा। मान्यता अनुसार पोंगल के दिन से ही तमिल नववर्ष की शुरुआत होगी। पोंगल का पहला दिन देवराज इंद्र को समर्पित होता है, इसे भोगी पोंगल भी कहा जाता है।
भोगी पोंगल
पहले दिन भोगी पोंगल के अवसर पर भगवान इंद्र देव की पूजा की जाती है। इस दिन प्रकृति का शुक्रिया अदा करते हुए इंद्रा देव को धन्यवाद देते हैं। इस दिन लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करते हैं और घर के पुराने-बेकार सामान को आग में डालते हैं।

सूर्य पोंगल
दूसरा दिन सूर्य पोंगल का होता है। यह सूर्य उत्तरायण के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव का आभार प्रकट करते हुए उनकी पूजा की जाती है। सूर्य पोंगल के दिन एक ख़ास तरह की खीर भी बनायी जाती है जिसे पोंगल खीर कहा जाता है।
मट्टू पोंगल
पर्व के तीसरे दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है, इस दिन पशुओं की पूजा कीई जाती है। इस दिन किसान परिवार अपने मवेशियों गाय, बैल आदि को सजाते हैं और उनकी पूजा करते हुए आभार प्रकट करते हैं। इसके साथ कई क्षेत्रों में बैलों की दौड़ का भी आयोजन किया जाता है।
कन्या पोंगल
पोंगल उत्सव का चौथा दिन कन्या पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन घरों को को सुंदर फूलों और पत्तों से सजाया जाता है, इसके साथ ही घरों के आँगन में सुंदर रंगोलियां मनाई जाती है। इस आखिरी दिन गन्ने, चावल, दूध और घी से बना ख़ास पकवान बनाते है।
पोंगल के पर्व उत्सव में लोक पकवान बनाए जाते हैं और लोक गीत गाये जाते हैं।
पोंगल पर्व का महत्व
पोंगल नई फसल और संपन्नता का प्रतीक होता है। यह पर्व मनुष्यों विशेषकर किसान परिवारों द्वारा प्रकृति को धन्यवाद कहने का भी पर्व होता है। इस पर्व से भगवान का भी शुक्रिया अदा किया जाता है जिनके आशीर्वाद से खेतों में फसल लहलाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
