Birthday के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं, प्रेमानंद महाराज से जानें इसका जवाब

वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी बहुत ही प्रसिद्ध है। इनके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं। महाराज जी के सत्संग सुनने के लिए लाखों श्रद्धालु देश-विदेश के कोने-कोने से पहुंचते हैं। महाराज जी सत्संग के दौरान अपनी मधुर वाणी से जीवन जीने की कला और कई तरह के उपदेश सीखाते हैं।

इसके साथ ही महाराज जी सत्संग के दौरान भक्तों के पूछे गए सवालों के जवाब भी देते हैं। सत्संग के दौरान एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से सवाल पूछा कि जन्मदिन पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं? आइये इसका जवाब प्रेमानंद महाराज जी के मुखारविंद से जानते हैं-

Premanand Ji Maharaj Pravachan Janamdin Ke Din Kya Kare Dos and Donts on Birthday

Birthday Ke Din Kya Kare Aur Kya Nahi

उत्सव मनाएं

प्रेमानंद महाराज जी सवाल का जवाब देते हुए बड़ी मधुर्तापूर्वक कहते हैं कि जिस दिन आपका जन्मदिन है उस दिन बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ उत्सव मनाए।

कीर्तन करें

महाराज जी कहते हैं इस दिन सच्ची श्रद्धा भाव के साथ घंटा 2 घंटा कीर्तन करें। ठाकुर जी को भोग लगाएँ और 10-20 लोगों को प्रसाद खिलाएँ।

वृद्धाश्रम जाएं

प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जिस दिन आपका जन्म दिन है और आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी है तो वृद्ध आश्रम चले जाएं। वहां जाकर उन लोगों को वस्त्र के साथ-साथ अच्छा भोजन, फल, जूस दें या अस्पताल में चल जाए और गरीब मरीज के इलाज में आपका पैसा कुछ काम आ जाए वैसी मदद करें।

जीवन बर्बाद

महाराज जी आगे कहते हैं कि जन्मदिन पर अगर आप शराब के गिलास लड़ा रहे हैं तो हमें लगता है कि आप अपना पूरा जीवन बर्बाद करने में तुले हैं।

मित्रों को भोजन कराएं

प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आप बड़े ही हर्ष उल्लास और धूमधाम के साथ उत्सव मनाए। इसके साथ ही संतों या अपने मित्रों को बुलाकर पवित्र भोजन करवाएँ।

महापाप

महाराज जी आगे कहते हैं कि जन्मदिन पर मांस कदापि न खाएं। इसके साथ ही मदिरा पान भी न करें। हमारे शास्त्रों में मदिरा सेवन को निषेध किया गया है तथा इसे पाप की श्रेणी में रखा गया है।

वस्त्र दान

महाराज जी कहते हैं कि अगर आप अपने जन्मदिन पर गरीब या जरूरतमंद व्यक्तियों को नए वस्त्र, भोजन या कुछ पैसे दे देते हैं तो आपका जन्मदिन निश्चित ही सफल हो जाएगा।

सेवा

महाराज जी कहते हैं कि जन्मदिन पर गौ माता की सेवा, संत सेवा और अतिथि सेवा, अनाथ सेवा बड़े ही श्रद्धापूर्वक तरीक़े से करनी चाहिए क्योंकि सभी रूपों में भगवान का वास होता है। इसके साथ ही पुण्य फल की भी प्राप्ति होती है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Monday, August 12, 2024, 13:45 [IST]
Desktop Bottom Promotion