लक्ष्मी माता क्यों नाराज होकर राजा को रंक बना देती हैं, प्रेमानंद महाराज ने बता दिए इसके 5 कारण

संत श्री प्रेमानंद गोविन्द शरण महाराज जी एक महान कथा वाचक हैं। महराज ने छोटी आयु में ही संन्यास ले लिया था। वे सदैव सत्य के मार्ग में चलें और काफी साल काशी में भी बिताए। महराज अभी वृंदावन में विराजमान हैं। महराज जी सत्संग और कथा के माध्यम से लाखों करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन करते हैं।

प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज बहुत ही प्रचलित हैं तथा सोशल मीडिया में लाखों फॉलोअर भी हैं। साथ ही विदेशों में भी इनके प्रवचन तथा कथा को बहुत पसंद किया जाता है। प्रेमानंद महाराज जी श्री राधा रानी के उपासक हैं। वे अपने ईष्ट के रूप में राधा रानी को मानते हैं।

Premanand Ji Maharaj Pravachan Kyu Naraz Ho Jati Hai Mata Laxmi Why Gets Angry Know the Reasons

आपको बता दें कि आजकल महाराज जी का एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है जिसमें एक भक्त उनसे सवाल कर रहा है कि कौन सी बुरी आदतें है जिनके कारण घर में विराजमान लक्ष्मी रूठकर चली जाती है। आइये जानते हैं इसपर प्रेमानंद महाराज जी ने क्या उत्तर दिया।

धन की देवी माता लक्ष्मी किन आदतों की वजह से रूठ जाती हैं?

1. प्रेमानंद महाराज जी ने बताया कि जिस घर में स्त्री बहुत क्रोधित रहती है उस घर से लक्ष्मी रूठ कर चली जाती है। साथ ही ऐसे लोगों पर माँ लक्ष्मी कभी कृपा नहीं करती है।

2. इसके बाद प्रेमानंद महाराज जी ने बताया कि जिस घर में सूर्योदय के बाद साफ सफाई होती है, उस घर से लक्ष्मी रुष्ठ हो जाती है। सूर्योदय के बाद साफ सफाई करना बहुत अशुभ माना गया है।

3. वहीं स्वामी जी ने बताया कि जिस घर में बंद घड़ी होती है तो उस घर में हमेशा तनाव एवं क्लेश की स्थिति बनी रहती है। ऐसे घरों में आपसी तालमेल नहीं होता है। जिसके परिणाम स्वरूप घर में आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है। बंद घड़ी हमेशा नकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न करती है।

4. स्वामी प्रेमानंद महाराज जी ने बताया कि जिस घर में लोग टूटी हुई कंघी से बाल सँवारते है, उस घर में हमेशा दरिद्रता बनी रहती है। साथ ही उनका जीवन संघर्षमय हो जाता है और गरीबी का स्तर बना रहता है। जीवन में सफलता की प्राप्ति नहीं हो पाती है।

5. स्वामी प्रेमानंद महाराज जी ने एक और बात बतायी कि जिस घर में टूटा हुआ दर्पण होता है वहाँ जीवन में कभी प्रसन्नता नहीं आ पाती है। ऐसे घरों में हमेशा पारिवारिक झगड़ा तथा मनमुटाव बना रहता है। परिवार के सदस्यों के चेहरे से मुस्कुराहट दूर हो जाती है और हँसी पर लगाम लग जाती है। ऐसी स्थिति में अपने निज निवास में कभी भी टूटे हुए दर्पण का प्रयोग न करें। स्वामी प्रेमानंद जी की बातों को अपने जीवन में आत्मसात् करें तथा अपने परिवार के साथ सुखी एवं सुविधाजनक जीवन बिताएं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Thursday, May 2, 2024, 13:40 [IST]
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