Latest Updates
-
Jitiya Vrat 2025 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है
Radha Ashtami Vrat Katha: राधा अष्टमी व्रत कथा जिसके बिना अधूरा है उपवास, आप भी पढ़ें
Radha Ashtami Vrat Katha/Aarti: राधा अष्टमी का पर्व श्रीकृष्ण की परमप्रेयसी और भक्ति की मूर्ति राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जी ने ब्रजभूमि के रावल गांव में जन्म लिया था। आज यानी 31 अगस्त को राधा अष्टमी व्रत रखा जा रहा है। जिस प्रकार श्रीकृष्ण के बिना राधा अधूरी मानी जाती हैं, उसी तरह राधा जी के बिना कृष्ण का भी स्वरूप अपूर्ण माना जाता है। इसी कारण भक्त राधा-कृष्ण की संयुक्त उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि राधा अष्टमी के दिन व्रत रखने और कथा सुनने से साधक को अखंड सौभाग्य, अपार भक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत पति-पत्नी के मधुर संबंधों को मजबूत करता है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा कर व्रत कथा सुनना जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश और दिव्य आनंद से भर देता है। आइए जानते हैं राधा अष्टमी व्रत कथा,महत्व और पूजा विधि।
राधा अष्टमी कब मनाई जाती है?
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है। ऐसे में आज यानी 31 अगस्त को राधा अष्टमी का व्रत किया जा रहा है क्योंकि 16 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई थी।

राधा अष्टमी का महत्व
इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से सौभाग्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है। अगर अविवाहित कन्याएं राधा अष्टमी का व्रत रखती हैं तो उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है। जो भक्त राधा-कृष्ण की सच्चे मन से आराधना करते हैं, उन्हें भक्ति मार्ग में सफलता मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने के बाद यदि राधा अष्टमी का व्रत रखा जाए तो उसका पूरा फल प्राप्त होता है।
राधा अष्टमी पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
स्वच्छ कपड़े पहनकर घर में पूजा स्थान को सजाएं।
राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
फूल, तुलसीदल, धूप, दीप, चंदन, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
राधा जी का विशेष भोग लगाएं फल, माखन-मिश्री, खीर आदि।
राधा अष्टमी व्रत कथा का श्रवण करें।
अंत में आरती करें और व्रत का फल अपने परिवार व भक्तों को समर्पित करें।
राधा अष्टमी संपूर्ण व्रत कथा
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को वृषभानु जी के घर राधा रानी का जन्म हुआ। रानी कीर्ति जी लंबे समय से संतानहीन थीं। उन्होंने कठोर तपस्या और भगवान विष्णु की आराधना की, तब उन्हें यह वरदान मिला कि उन्हें स्वयं लक्ष्मी जी का अंश रूप पुत्री के रूप में प्राप्त होंगी। उसी वरदान के फलस्वरूप भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन रानी कीर्ति ने एक दिव्य बालिका को जन्म दिया। इस बालिका का शरीर तो अत्यंत सुंदर और तेजस्वी था, किंतु उसने जन्म लेते ही अपनी आंखें बंद कर लीं।
यह देखकर वृषभानु और उनकी पत्नी कीर्ति चिंतित हो उठे। उन्होंने मुनियों और ऋषियों से इसका कारण पूछा। तब नारद जी ने बताया कि यह बालिका साधारण नहीं है। यह स्वयं श्रीकृष्ण की अनन्य प्रेयसी और भक्ति की मूर्ति है। यह तब तक आंखें नहीं खोलेगी जब तक कि श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं करेगी। कुछ समय बाद नंद बाबा अपनी पत्नी यशोदा और नन्हें बालक कृष्ण के साथ वृषभानु जी के घर आए। जब नंद के गोद में कृष्ण थे, तभी पहली बार उस दिव्य बालिका ने अपनी आंखें खोलीं और श्रीकृष्ण का दर्शन किया। जैसे ही राधा ने कृष्ण को देखा, उनके नेत्रों में दिव्य आभा प्रकट हुई और मुख पर अद्भुत तेज झलक उठा। तब से ही राधा और कृष्ण का संबंध अमर और अविभाज्य हो गया। राधा जी को प्रेम और भक्ति का स्वरूप माना जाता है और उनका जन्मोत्सव राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
राधा रानी की आरती
आरती श्री राधा रानी की,
श्री वृन्दावन धाम की।
श्री राधा जी के चरणों में,
सुख मिले सब काम की॥
जय जय राधे, जय जय राधे,
जय जय श्री राधे।
जय जय राधे, जय जय राधे,
जय जय श्री राधे॥
राधा रानी रस की खान,
प्रेम भक्ति की पहचान।
श्रीकृष्ण की जीवन संगिनी,
भक्तों की प्राण अधीश्वरी॥
जय जय राधे, जय जय राधे,
जय जय श्री राधे।
जय जय राधे, जय जय राधे,
जय जय श्री राधे॥



Click it and Unblock the Notifications
