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रक्षाबंधन पर्व पर केदारनाथ में होता है अन्नकूट भतूज पर्व, जानें क्यों अनाज से किया जाता है बाबा का श्रृंगार
Annakoot Bhatuj Festival: पंचांग के अनुसार, हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। वहीं इससे एक दिन पहले श्री केदारनाथ धाम में अन्नकूट भतूज उत्सव का आयोजन किया जाता है।
यह उत्सव अर्धरात्रि में मनाया जाता है। इस मौके पर उत्तराखंड के केदारनाथ धाम को बहुत खूबसूरत ढंग से सजाया जाता है। आइये जानते हैं कि रक्षाबंधन के मौके पर केदारनाथ में होने वाला अन्नकूट भतूज उत्सव क्या है।

इस वर्ष का भतूज उत्सव
इस वर्ष केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में भतूज अन्नकूट उत्सव के लिए बड़ी संख्या में भक्त और दर्शनाभिलाशी धाम में पहुँचे। 12 लाख से अधिक श्रद्धालु अबतक केदारनाथ पहुंचें हैं। रक्षाबंधन से एक दिन पहले की रात यानी मंगलवार की रात को यह उत्सव मनाया गया। इस विशेष मौके के लिए केदारनाथ मंदिर को 15 क्विंटल फूलों से सजाया गया।
देव डोलियों का दर्शन
इस अवसर पर केदारनाथ क्षेत्र की देवी कात्यायनी डौल्या देवी ने भी भगवान केदारनाथ के दर्शन किये। देवी के साथ साथ अन्य देव डोलियों का सोमवार शाम केदारनाथ धाम पहुंचने पर मंदिर समिति तथा श्री केदार सभा द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
नये चावल का चढ़ावा
भतूज के दिन नये चावलों का पका भोज भगवान् को धाम में चढ़ाया जाता है। इस भोग से ही धाम में स्थापित शिवलिंग को लेपकर ढका जाता है। फिर रात भर दर्शन के पश्चात सुबह उन पके चावल को शिवलिंग से उतारकर मंदाकिनी नदी में प्रवाहित किया जाता है। मान्यता है जिस भी प्रजाति के नए चावलों को इस दिन शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है उन प्रजाति से किसी भी प्रकार के विष या खराबी खत्म हो जाती है। इस वर्ष केदारनाथ में हक़ हुकधारी चावलों की किस्म का भोग लगाया गया है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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